➤ हिमाचल में मानसून कमजोर, 12 सितंबर तक बारिश का अलर्ट नहीं
➤ धूप से तापमान 2-3 डिग्री बढ़ेगा, मैदानी इलाकों में उमस बढ़ने के आसार
➤ मानसून में 1,242 करोड़ की संपत्ति तबाह, 274 लोगों की मौत
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ गया है। शिमला और मनाली समेत प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में सोमवार सुबह से मौसम साफ बना हुआ है, जबकि कुछ क्षेत्रों में हल्के बादल छाए रहे। बारिश के लंबे दौर के बाद अब प्रदेश में मौसम के करवट लेने के संकेत हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले पांच से छह दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप खिलने की संभावना है। इस दौरान कुछेक स्थानों पर ही हल्की बारिश हो सकती है। खास बात यह है कि 12 सितंबर तक प्रदेश के किसी भी जिले में बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में और कमी आएगी। ज्यादातर क्षेत्रों में दिन के समय धूप निकलने से तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदेश के अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान पहले ही सामान्य से अधिक चल रहा है। ऐसे में मौसम साफ होने के साथ मैदानी क्षेत्रों में लोगों को दिन के समय उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम फिलहाल सुहावना बना रहने की संभावना है।
मानसून सीजन में सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश
हिमाचल में इस बार मानसून का असर पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कई क्षेत्रों में अलग-अलग रहा है। मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य के 12 जिलों में से 8 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि चार जिलों में सामान्य से ज्यादा बादल बरसे हैं।
बारिश की कमी के बावजूद मानसून के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बादल जमकर बरसे और भारी बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने जैसी घटनाओं ने बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया। कई क्षेत्रों में बारिश ने जनजीवन और सरकारी ढांचे को प्रभावित किया।
बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड से 1,242 करोड़ का नुकसान
इस मानसून सीजन में बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड ने हिमाचल में सरकारी और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रदेश में अब तक करीब 1,242 करोड़ रुपये की संपत्ति तबाह हो चुकी है। इसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ आम लोगों की निजी संपत्ति को हुआ नुकसान भी शामिल है।
सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग (PWD) को उठाना पड़ा है। बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पीडब्ल्यूडी की करीब 951 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने मानसून के दौरान सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है।
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर सड़कें प्रभावित हुईं। पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में भारी बारिश के बाद भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और इसका सीधा असर सड़क संपर्क पर पड़ता है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
122 मकान पूरी तरह जमींदोज
मानसून की बारिश ने कई परिवारों को सीधे प्रभावित किया है। प्रदेश में बारिश और भूस्खलन से अब तक 122 मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं। इसके अलावा 494 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। कई परिवारों के सामने अपने आशियाने को बचाने और सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती पैदा हुई।
प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं रहा। प्रदेश में अब तक 17 दुकानें, 6 लेबर शेड और 460 गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। गौशालाओं को हुए नुकसान से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ी हैं। बारिश के कारण पहले से ही प्रभावित ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका अतिरिक्त असर पड़ा है।
मानसून में 274 लोगों की मौत
हिमाचल में इस मानसून सीजन के दौरान जानमाल का नुकसान भी बेहद गंभीर रहा है। 1 जून से 6 सितंबर तक प्रदेश में 274 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा मौतें सड़क हादसों में हुई हैं।
आंकड़ों के अनुसार मानसून सीजन में 164 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है। इसके अलावा 18 लोगों की मौत लैंडस्लाइड के कारण हुई है। फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ की घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि 13 लोगों की पानी में डूबने से जान गई। बाकी मौतें अन्य कारणों से हुई हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि मानसून के दौरान हिमाचल में चुनौती केवल भारी बारिश तक सीमित नहीं रही। पहाड़ी सड़कों पर सफर, भूस्खलन, नदी-नालों का बढ़ता जलस्तर और अचानक आने वाली बाढ़ ने लोगों की जान के लिए भी खतरा पैदा किया।
अब मौसम साफ, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं
फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश में भारी बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। 12 सितंबर तक किसी भी जिले में बारिश का अलर्ट नहीं होने से प्रशासन और आम लोगों को राहत मिल सकती है। धूप निकलने से बारिश और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के काम को भी गति मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, मानसून सीजन के दौरान हुए नुकसान के आंकड़े बताते हैं कि इस साल प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल में बड़ी कीमत वसूली है। 1,242 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान और 274 लोगों की मौत इस मानसून की गंभीर तस्वीर सामने रखती है। आने वाले दिनों में मौसम भले ही शांत रहने की संभावना हो, लेकिन मानसून से हुए नुकसान की भरपाई और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी।



