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हिमाचल को पूर्ण साक्षर राज्य का राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में शिक्षा मंत्री ने लिया अवार्ड

हिमाचल को पूर्ण साक्षर राज्य का राष्ट्रीय सम्मान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने दिल्ली में लिया अवार्ड
99.55% साक्षरता के साथ हिमाचल देश में दूसरे स्थान पर, गोवा 99.7% के साथ पहले नंबर पर
2026-27 में 100% साक्षरता का लक्ष्य, ULLAS के तहत डिजिटल और व्यावसायिक शिक्षा पर भी जोर


हिमाचल प्रदेश ने साक्षरता के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल करने पर मंगलवार शाम दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की ओर से यह सम्मान प्राप्त किया। यह उपलब्धि प्रदेश को न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (ULLAS) के तहत मिली है।

हिमाचल प्रदेश की मौजूदा साक्षरता दर 99.55 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके साथ ही हिमाचल देश के सबसे अधिक साक्षर राज्यों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। गोवा 99.7 प्रतिशत साक्षरता के साथ पहले स्थान पर है। खास बात यह है कि हिमाचल को इससे पहले 8 सितंबर 2025 को 99.3 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया था। अब एक साल के भीतर प्रदेश की साक्षरता दर बढ़कर 99.55 प्रतिशत हो गई है।

ULLAS के तहत सभी 12 जिलों को किया गया कवर

प्रदेश में न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम वर्ष 2023-24 में लागू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों को कवर किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से उन वयस्कों तक पहुंचने का प्रयास किया गया, जिन्हें बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान की आवश्यकता थी।

अब तक प्रदेश में 94,930 शिक्षार्थियों की पहचान की गई है और उन्हें ULLAS पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। इन शिक्षार्थियों को पढ़ाने के लिए 19,232 स्वयंसेवी शिक्षकों को भी पंजीकृत और प्रशिक्षित किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और शिक्षार्थियों की भागीदारी को साक्षरता अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना गया है।

तीन चरणों में हुआ FLNAT, 61,542 शिक्षार्थियों का आकलन

वयस्कों के बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान का आकलन करने के लिए प्रदेश में तीन चरणों में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी असेसमेंट टेस्ट (FLNAT) आयोजित किए गए।

पहली परीक्षा सितंबर 2024 में हुई। इसमें कुल 15,351 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 14,516 अभ्यर्थी पास हुए। इस परीक्षा का पास प्रतिशत 94.6 प्रतिशत रहा।

इसके बाद मार्च 2025 में दूसरी परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 28,534 अभ्यर्थियों का आकलन हुआ और इनमें से 28,062 अभ्यर्थी पास हुए। दूसरी परीक्षा में पास प्रतिशत बढ़कर 98.3 प्रतिशत रहा।

तीसरी परीक्षा मार्च 2026 में हुई। इसमें 17,657 शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 17,318 पास हुए। इस परीक्षा का पास प्रतिशत 98.1 प्रतिशत रहा।

तीनों परीक्षाओं को मिलाकर कुल 61,542 शिक्षार्थियों का आकलन किया गया, जिनमें 59,896 शिक्षार्थी पास हुए। इस तरह तीनों परीक्षाओं का कुल पास प्रतिशत 97.3 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा प्रदेश में संचालित वयस्क साक्षरता अभियान की व्यापकता और परीक्षा परिणामों को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर संबोधित करते हुए।

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार का दावा

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने केवल साक्षरता के क्षेत्र में ही प्रगति नहीं की है, बल्कि स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 में हिमाचल की राष्ट्रीय रैंकिंग 13वें स्थान से सुधरकर छठे स्थान पर पहुंच गई है। राज्यों के स्तर पर हिमाचल तीसरे स्थान पर है।

राष्ट्रीय स्तर के आकलन में भी हिमाचल प्रदेश ने सीखने के परिणामों के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश इस आकलन में देश में पांचवें स्थान पर रहा है। वर्ष 2021 में हिमाचल इस आकलन में 21वें स्थान पर था। ऐसे में कुछ वर्षों के भीतर 21वें स्थान से पांचवें स्थान तक पहुंचना स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के तौर पर देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल के शिक्षा मंत्री और अन्य।

अब लक्ष्य 100 प्रतिशत साक्षरता हासिल करना

पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल करने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने अब अपना अगला लक्ष्य भी तय कर दिया है। सरकार ने वर्ष 2026-27 में प्रदेश को 100 प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा है।

इसके साथ ही ULLAS कार्यक्रम को केवल बुनियादी साक्षरता तक सीमित न रखते हुए साक्षरता के बाद की शिक्षा पर भी फोकस करने की योजना है। इसके तहत लोगों के लिए आजीवन सीखने, डिजिटल साक्षरता और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साक्षरता हासिल करने के बाद शिक्षार्थी अपनी शिक्षा और कौशल को आगे भी जारी रख सकें तथा बदलती जरूरतों के अनुरूप डिजिटल और व्यावसायिक ज्ञान प्राप्त कर सकें।

शिक्षा मंत्री ने विभाग, शिक्षकों और स्वयंसेवकों को दिया श्रेय

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल की इस उपलब्धि का श्रेय किसी एक संस्था या वर्ग को देने के बजाय शिक्षा विभाग, शिक्षकों, स्वयंसेवकों, शिक्षार्थियों और प्रदेश के लोगों के सामूहिक प्रयासों को दिया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल का लगभग पूर्ण साक्षरता तक पहुंचना लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। प्रदेश में शिक्षा को लगातार प्राथमिकता दिए जाने और इसके लिए किए गए निवेश ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आजादी के समय करीब 5 प्रतिशत थी हिमाचल की साक्षरता

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल की मौजूदा उपलब्धि की तुलना आजादी के समय की स्थिति से करते हुए कहा कि आजादी के समय देश की साक्षरता दर करीब 13 प्रतिशत थी, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह महज 5 प्रतिशत के आसपास थी।

ऐसे समय में जब प्रदेश की साक्षरता दर करीब पांच प्रतिशत के स्तर पर थी, वहां से आज 99.55 प्रतिशत तक पहुंचना हिमाचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह बदलाव प्रदेश में दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को भी रेखांकित करता है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे हिमाचल में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार किए गए निवेश और प्राथमिकता की अहम भूमिका रही है। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत नींव रखी थी। इसके बाद आने वाली सरकारों ने भी शिक्षा को प्राथमिकता दी और इसी निरंतर प्रयास का परिणाम आज प्रदेश की लगभग पूर्ण साक्षरता के रूप में सामने आया है।

99.55 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक पहुंचने की चुनौती

हिमाचल प्रदेश अब देश के सबसे अधिक साक्षर राज्यों की सूची में दूसरे स्थान पर है। 99.55 प्रतिशत साक्षरता का स्तर हासिल करने के बाद प्रदेश के सामने अब शेष अंतर को खत्म कर 100 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करने की चुनौती है।

सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए यह लक्ष्य तय किया है। साथ ही ULLAS के माध्यम से साक्षरता के बाद की शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना यह संकेत देती है कि अभियान का अगला चरण केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल ज्ञान, आजीवन शिक्षा और व्यावसायिक कौशल को भी इसके दायरे में शामिल किया जाएगा।

हिमाचल को दिल्ली में मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश की उस लंबी शैक्षिक यात्रा को रेखांकित करता है, जो आजादी के समय करीब पांच प्रतिशत साक्षरता से शुरू होकर अब 99.55 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच चुकी है।