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शिमला में हेयर ड्रेसर निकला नशा तस्करी का आरोपी, 1.64 करोड़ की संपत्ति सीज; दुकान से मिली थी अफीम

ठियोग के हेयर ड्रेसर पर नशा तस्करी का आरोप, 1.64 करोड़ की संपत्ति सीज
दुकान से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद होने के बाद गिरफ्तार हुआ था आरोपी सोहन लाल उर्फ हैपी
जांच में आय और संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर मिला, ठियोग से कोटखाई और रोहड़ू तक अफीम सप्लाई का आरोप


शिमला में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई अब केवल गिरफ्तारी और नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गई है। शिमला पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़े ठियोग के एक आरोपी की कथित अवैध कमाई पर भी शिकंजा कसा है। पुलिस ने हेयर ड्रेसर सोहन लाल उर्फ हैपी की 1.64 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की हैं। पुलिस की वित्तीय जांच में इन संपत्तियों का संबंध प्रथम दृष्टया मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित आय से पाया गया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना ठियोग में 10 जून को धारा 18 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने न केवल नशे की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी की कार्रवाई की, बल्कि उसकी आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों की भी जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी और उसके निकट सहयोगियों की वित्तीय गतिविधियों, संपत्तियों तथा आय के वैध स्रोतों को खंगाला गया।

हेयर ड्रेसर की दुकान की तलाशी में मिली थी करीब 71 ग्राम अफीम

पुलिस के मुताबिक, रहीघाट, हॉस्पिटल रोड ठियोग में आरोपी सोहन लाल उर्फ हैपी की हेयर ड्रेसर की दुकान है। पुलिस ने दुकान की तलाशी ली तो उसके कब्जे से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद हुई।

नशीला पदार्थ बरामद होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और मामले की जांच आगे बढ़ाई गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी कथित तौर पर लंबे समय से अफीम की अवैध तस्करी में संलिप्त था।

पुलिस के अनुसार, वह ठियोग के अलावा कोटखाई, रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों में अफीम की आपूर्ति करता था। इसी आधार पर पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए नशे के कथित नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन और संपत्तियों पर भी ध्यान केंद्रित किया।

नशे की कमाई से संपत्ति बनाने का पुलिस को प्रथम दृष्टया संदेह

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी और उसके निकट सहयोगियों की वित्तीय गतिविधियों और संपत्तियों की जांच की। इसके साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया गया कि आरोपी के पास मौजूद संपत्तियों और उसकी आय के वैध स्रोतों के बीच कितना संबंध है।

वित्तीय जांच में पुलिस ने एक आवासीय भूमि प्लॉट, एक कृषि भूमि का प्लॉट, दो मंजिला दुकान, एक वाहन तथा बैंक और डाकघर के खातों में जमा राशि समेत करीब 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान की।

पुलिस के मुताबिक, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच में इन संपत्तियों का संबंध प्रथम दृष्टया मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से अर्जित आय से पाया गया। जांच में आरोपी की घोषित या वैध आय और उसकी संपत्तियों के बीच भी पर्याप्त अंतर सामने आया।

आय और संपत्तियों के बीच अंतर मिलने के बाद सीज की गईं संपत्तियां

पुलिस की वित्तीय जांच में सामने आए इस अंतर को मामले में अहम माना गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी की आय के वैध स्रोतों की तुलना में उसकी संपत्तियों का मूल्य काफी अधिक पाया गया।

इसके बाद एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत करीब 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों को सीज किया गया। इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने नशा तस्करी से कथित तौर पर अर्जित संपत्ति को निशाना बनाया है।

शिमला पुलिस की इस कार्रवाई का दायरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नशीले पदार्थ की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ कथित तौर पर उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों और संपत्ति के नेटवर्क की भी जांच की गई।

ठियोग से आसपास के क्षेत्रों तक अफीम सप्लाई का आरोप

पुलिस जांच में आरोपी के बारे में यह भी सामने आया कि वह कथित तौर पर लंबे समय से अफीम की अवैध तस्करी में शामिल था। पुलिस के अनुसार, नशे की आपूर्ति ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों तक की जाती थी।

दुकान से अफीम बरामद होने के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस ने आरोपी की वित्तीय गतिविधियों को भी जांच के दायरे में लिया। इसके परिणामस्वरूप जमीन, दुकान, वाहन और बैंक-डाकघर खातों में जमा राशि सहित कई संपत्तियों की पहचान की गई।

नशा तस्करों की अवैध कमाई पर पुलिस का शिकंजा

शिमला पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि नशा तस्करी के मामलों में पुलिस अवैध कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों को भी जांच के दायरे में ला रही है। ठियोग के इस मामले में पुलिस ने आरोपी से जुड़ी करीब 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों को सीज किया है।

पुलिस के अनुसार, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इन संपत्तियों का संबंध प्रथम दृष्टया मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित आय से पाया गया। साथ ही आरोपी की आय और संपत्तियों के बीच पर्याप्त अंतर भी सामने आया।

इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई 71 ग्राम अफीम की बरामदगी से शुरू हुई थी और जांच आगे बढ़ने पर कथित तौर पर 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों तक पहुंची। अब पुलिस की वित्तीय जांच ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां कथित नशे की कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।