➤ डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार किया
➤ सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को चीफ इंजीनियर के पद पर एडवाइजर के रूप में काम की अनुमति
➤ अंजोरी कपूर CEO के रूप में कार्य करती रहेंगी, अपील लंबित रहने तक यही व्यवस्था
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमुडा के चीफ इंजीनियर और CEO पद से जुड़े विवाद में अंतरिम व्यवस्था को लेकर अहम आदेश दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस फैसले पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की CEO के पद पर नियुक्ति को रद्द किया गया था। हालांकि, अदालत ने अपीलकर्ता सुरिंदर कुमार वशिष्ठ के हितों की रक्षा के लिए सीमित अंतरिम राहत दी है। उन्हें चीफ इंजीनियर, हिमुडा के पद पर एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटजी) के रूप में काम करने की अनुमति दी गई है। वहीं, अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिट याचिकाकर्ता अंजोरी कपूर चीफ इंजीनियर हिमुडा के पद पर CEO के रूप में कार्य करती रहेंगी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि अपील लंबित रहने के दौरान यही अंतरिम व्यवस्था न्याय के हित में रहेगी। यह आदेश चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की डिवीजन बेंच ने 16 सितंबर 2026 को सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की ओर से दायर LPA पर पारित किया।
इस मामले की पृष्ठभूमि में 3 सितंबर 2026 को सिंगल बेंच का फैसला आया था। उस फैसले में जस्टिस ज्योत्सना रेवाला दुआ ने अंजोरी कपूर की याचिका स्वीकार करते हुए सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की CEO-cum-Secretary, HIMUDA के पद पर नियुक्ति को रद्द किया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को लागू सेवा नियमों के अनुसार पात्र अधिकारियों में से नियुक्ति करने और अंजोरी कपूर के मामले पर भी विचार करने का निर्देश दिया था।
सिंगल जज के फैसले पर पूरी रोक नहीं
डिवीजन बेंच के समक्ष सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने उनके पदोन्नति और नियुक्ति से जुड़े घटनाक्रम को अदालत के सामने रखा। दलील दी गई कि 1 फरवरी 2023 को अधीक्षण अभियंता (SE) के पद को चीफ इंजीनियर के पद पर अपग्रेड किया गया था। इसके अगले दिन यानी 2 फरवरी 2023 को विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की बैठक हुई और सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नत किया गया।
बाद में 3 मई 2025 को हिमुडा के एक चीफ इंजीनियर पद को एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटजी) के रूप में पुनर्नामित किया गया। इसके बाद 27 मई 2025 को स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को हिमुडा का CEO नियुक्त किया गया, जबकि अंजोरी कपूर को एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटजी) बनाया गया था।
सिंगल बेंच ने 27 मई 2025 की नियुक्तियों से संबंधित अधिसूचना को रद्द करते हुए हिमुडा के CEO-cum-Secretary पद पर नियुक्ति को 2012 के संबंधित सेवा नियमों के अनुसार करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने पात्र अधिकारियों के मामलों पर विचार कर दो सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने को कहा था।
सुरिंदर वशिष्ठ की ओर से क्या दलील दी गई
अपीलकर्ता सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की ओर से अदालत में कहा गया कि जिस पद पर उन्हें पदोन्नत किया गया था, उसके अपग्रेडेशन के आदेश में यह भी प्रावधान था कि पद बाद में SE के पद पर वापस आ जाएगा। उनका पक्ष था कि ऐसे में तीन साल से अधिक समय बाद उनकी पदोन्नति प्रभावित होने से उन्हें नुकसान होगा।
उनकी ओर से अंतरिम राहत की मांग करते हुए यह भी दलील दी गई कि अंजोरी कपूर की ओर से दायर रिट याचिका 4 अक्टूबर 2024 को काफी देरी के बाद दाखिल की गई थी। इसी आधार पर अपील के लंबित रहने के दौरान उनके हितों की रक्षा किए जाने की मांग की गई।
अंजोरी कपूर की ओर से किया गया विरोध
अंजोरी कपूर की ओर से अदालत में सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की वरिष्ठता और पदोन्नति का घटनाक्रम सामने रखा गया। उनके पक्ष की ओर से बताया गया कि उन्हें 1 सितंबर 2014 को SE के पद पर पदोन्नति मिली थी, जबकि सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को इस पद पर बाद में 20 मार्च 2017 को पदोन्नत किया गया।
इसके बाद सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को 9 दिसंबर 2022 को चीफ इंजीनियर के पद पर पदोन्नति मिली। इसके बाद 1 फरवरी 2023 को SE के पद को अपग्रेड किया गया और अगले दिन DPC की बैठक में सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को पदोन्नति दी गई।
अंजोरी कपूर की ओर से सिंगल जज के फैसले में दर्ज निष्कर्षों का भी हवाला दिया गया। सिंगल बेंच के फैसले में संबंधित पद के अपग्रेडेशन को सुरिंदर कुमार वशिष्ठ से जुड़ा व्यक्तिगत उपाय बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। सिंगल बेंच ने यह भी माना था कि CEO-cum-Secretary के पद के लिए लागू नियमों के तहत सुरिंदर कुमार वशिष्ठ पात्र नहीं थे, जबकि अंजोरी कपूर पात्रता की शर्तें पूरी करती थीं।
CEO पद को लेकर क्या था पूरा विवाद
हिमुडा में CEO-cum-Secretary का पद 2012 के सेवा नियमों से संचालित होता है। सिंगल बेंच के रिकॉर्ड के अनुसार, CEO के एकमात्र पद को निर्धारित परिस्थितियों में Chief Engineers (Civil) में से नियुक्ति, स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरा जाना था और संबंधित अधिकारी के लिए निर्धारित नियमित सेवा की पात्रता भी आवश्यक थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि सुरिंदर कुमार वशिष्ठ उस समय नियमित आधार पर चीफ इंजीनियर के पद पर नहीं थे।
सिंगल बेंच ने इसी आधार पर 27 मई 2025 की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और सरकार को लागू नियमों के अनुसार पात्र अधिकारियों पर विचार करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि वशिष्ठ को CEO पद पर रहते हुए मिले वित्तीय लाभ उनसे वापस नहीं लिए जाएंगे।
3 मई 2025 को बदला गया था पद का स्वरूप
मामले में एक अहम घटनाक्रम 3 मई 2025 का भी है। उस दिन राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत हिमुडा के एक चीफ इंजीनियर पद को Advisor (Policy & Strategy) के रूप में पुनर्नामित किया गया था। सिंगल बेंच के फैसले में दर्ज विवरण के अनुसार, इस पुनर्नामित पद को CEO-cum-Secretary के समान दर्जा और वेतन स्तर देने का प्रावधान किया गया था। इसके बाद 27 मई 2025 को अंजोरी कपूर को एडवाइजर (पॉलिसी एंड स्ट्रेटजी) और सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को CEO नियुक्त किया गया था।
अंजोरी कपूर ने इसी व्यवस्था और सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की CEO नियुक्ति को अदालत में चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि वह नियमित रूप से पदोन्नत चीफ इंजीनियर थीं और लागू नियमों के तहत CEO पद के लिए विचार किए जाने की पात्र थीं।
डिवीजन बेंच ने अब क्या व्यवस्था दी
डिवीजन बेंच ने कहा कि सिंगल जज के फैसले पर पूरी तरह रोक लगाने का आधार नहीं है और मामले पर विस्तृत विचार की आवश्यकता है। इसके साथ ही अदालत ने सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की अपील को एडमिट कर लिया।
हालांकि, उनकी ओर से रखी गई दलीलों को देखते हुए अदालत ने सीमित अंतरिम राहत प्रदान की। उन्हें चीफ इंजीनियर के पद पर एडवाइजर के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दी गई है। दूसरी ओर, अंजोरी कपूर के CEO के रूप में कार्य करने की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
इस तरह फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश के तहत दोनों अधिकारियों से जुड़ी भूमिकाओं को लेकर एक अस्थायी व्यवस्था बनी रहेगी। अंतिम स्थिति अपील की सुनवाई और आगे आने वाले न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगी। सरकारी रिकॉर्ड की मौजूदा ऑनलाइन टेलीफोन डायरेक्टरी में भी सुरिंदर कुमार वशिष्ठ को CEO-cum-Secretary और अंजोरी कपूर को Adviser Policy & Strategy के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।



