➤ सिद्धबाड़ी में चिन्मय अमृत महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल
➤ चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा को बताया प्रेरणादायी
➤ ज्ञान, भक्ति और सेवा को समाज के लिए बताया महत्वपूर्ण
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने शनिवार शाम कांगड़ा के सिद्धबाड़ी स्थित चिन्मय तपोवन आश्रम, संदीपनी हिमालय में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा तथा पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के जीवन और योगदान को समर्पित था। इस अवसर पर मिशन की आध्यात्मिक गतिविधियों, समाज सेवा और भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण से जुड़े कार्यों को स्मरण किया गया। राज्यपाल ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सेवा-संस्कृति देश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। राज्यपाल का पद और उनका वर्तमान कार्यकाल हिमाचल प्रदेश राजभवन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी दर्ज है।
राज्यपाल ने कहा कि चिन्मय मिशन ने भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के विचारों ने देश और विदेश में लोगों को भारतीय दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन से जोड़ने का कार्य किया। 75 वर्षों की इस यात्रा को उन्होंने आध्यात्मिक गतिविधियों और समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया।
ज्ञान, सेवा और साधना की परंपरा का उल्लेख
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान, सेवा, साधना और मानव कल्याण की समृद्ध परंपरा रही है। उनके अनुसार ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने के साथ समाज में सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करने में भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की महान ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के साथ सेवा का भाव भी देश की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहा है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देती है।
गीता को बताया जीवन का मार्गदर्शन देने वाली प्रेरणा
कार्यक्रम में राज्यपाल ने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसके माध्यम से मानव जीवन को बेहतर बनाने और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने और कर्तव्य का बोध कराने वाली प्रेरणा के रूप में भी देखा जा सकता है।
राज्यपाल ने ज्ञान, भक्ति और सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सत्य का बोध कराता है, भक्ति में श्रद्धा और विनम्रता का भाव विकसित होता है तथा सेवा की भावना व्यक्ति को ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर ले जाती है। उनके अनुसार समाज और राष्ट्र के विकास में ऐसी सोच महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आधुनिकता के साथ मानवीय मूल्यों पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन में बड़े बदलाव किए हैं। ऐसे समय में आधुनिकता के साथ संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य तभी सार्थक माना जा सकता है, जब उसके केंद्र में मानवता और समाज का कल्याण हो।
उन्होंने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सनातन चेतना में विश्व कल्याण की कामना का भाव रहा है। उन्होंने इस भावना को आगे बढ़ाने और समाज तथा विश्व के कल्याण की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता बताई।
युवाओं को संस्कार और आधुनिक ज्ञान से जोड़ने की बात
राज्यपाल ने युवा पीढ़ी को देश की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि युवाओं में संस्कार, राष्ट्रभक्ति, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ उन्हें आधुनिक ज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर भी मिलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन चेतना, ज्ञान परंपरा और सेवा भावना को आगे बढ़ाकर देश के विकास के साथ विश्व कल्याण में भी योगदान दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
चिन्मय अमृत महोत्सव में कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया।
इस अवसर पर स्वामी मित्रानंद ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा तथा पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वरिष्ठ आचार्य परमशेखर, स्वामी माधवानंद, स्वामी अनुकूलानंद, पद्मश्री क्षमा मैत्रेय, ट्रस्टी डॉ. राजन गुप्ता, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित चिन्मय मिशन से जुड़े पदाधिकारी, साधक और श्रद्धालु मौजूद रहे।



