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उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनुपालना न करने पर BDO निलंबित

ग्रामीण विकास विभाग ने पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया
वैध सरकारी निर्देशों का पालन न करने का विभागीय आदेश में उल्लेख
निलंबन अवधि में शिमला रहेगा मुख्यालय, अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित


मंडी जिले के गोहर विकास खंड से जुड़ी बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। ग्रामीण विकास विभाग ने गोहर के खंड विकास अधिकारी पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय आदेश में कार्रवाई का आधार सक्षम उच्च प्राधिकारी की ओर से जारी वैध निर्देशों का अनुपालन और उनका क्रियान्वयन नहीं करना बताया गया है। विभाग ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार निलंबन का आदेश 20 सितंबर 2026 को सामने आया और इसमें निलंबन अवधि के दौरान पवन कुमार का मुख्यालय ग्रामीण विकास विभाग निदेशालय, शिमला निर्धारित किया गया है।

विभागीय आदेश के मुताबिक, उच्चाधिकारी की ओर से जारी निर्देशों का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की गई है। निलंबन के साथ ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आदेश और रिपोर्ट में उस विशेष निर्देश की पूरी प्रकृति या उससे जुड़े सभी तथ्य विस्तार से सामने नहीं आए हैं, जिसकी अनुपालना न होने को कार्रवाई का आधार बताया गया है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी

विभाग ने पवन कुमार के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की है। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1965 के नियम 10 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन के बाद अब विभागीय स्तर पर मामले से जुड़े तथ्यों, परिस्थितियों और संबंधित अधिकारी के पक्ष की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

इस स्तर पर यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर अंतिम विभागीय निष्कर्ष या किसी आरोप की अंतिम पुष्टि के रूप में इसे प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े विस्तृत तथ्य और निष्कर्ष सामने आ सकेंगे।

निलंबन अवधि में शिमला रहेगा मुख्यालय

निलंबन आदेश में पवन कुमार का मुख्यालय ग्रामीण विकास विभाग निदेशालय, शिमला निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार उन्हें सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। निलंबन संबंधी आदेश की प्रतियां विभाग के संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। इनमें ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक, मंडलायुक्त मंडी और जिला विकास अधिकारी मंडी सहित संबंधित अधिकारी शामिल हैं।

इस व्यवस्था के तहत निलंबन अवधि में अधिकारी को विभागीय नियमों के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आगे की कार्रवाई विभागीय जांच और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

पंचायत सचिवों के तबादले से भी जुड़ा मामला चर्चा में

गोहर विकास खंड में हाल में बासा और सेरी पंचायतों से जुड़े दो पंचायत सचिवों के तबादले के आदेश भी चर्चा में रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार दोनों सचिवों को निर्धारित समय के भीतर कार्यभार सौंपने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, दोनों के पास अतिरिक्त पंचायतों का कार्यभार होने और बाद में चिकित्सा अवकाश पर जाने के कारण कार्यभार सौंपने की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।

इस घटनाक्रम को कुछ रिपोर्टों में बीडीओ के निलंबन से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यहां यह महत्वपूर्ण है कि विभागीय निलंबन आदेश में इन तबादला आदेशों का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इस संबंध को स्थापित तथ्य के बजाय रिपोर्टों में सामने आई चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ख्योड़ नलवाड़ मेले के बीच निलंबन से बढ़ी चर्चा

गोहर उपमंडल में ख्योड़ नलवाड़ मेला भी इन दिनों आयोजित हो रहा है। इसी दौरान बीडीओ पवन कुमार के निलंबन का आदेश सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को मेले से जुड़े घटनाक्रम के साथ जोड़कर चर्चा की जा रही है। हालांकि, विभागीय आदेश में मेले को निलंबन का कारण नहीं बताया गया है। इसलिए मेले से जुड़े संभावित कारणों को फिलहाल आधिकारिक तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

रिपोर्ट के अनुसार पवन कुमार मेले की पहली संध्या में मुख्य अतिथि भी रहे थे। इसके बाद निलंबन आदेश सामने आने से स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हुई। लेकिन कार्रवाई के आधिकारिक आधार के तौर पर विभाग ने उच्चाधिकारी के वैध निर्देशों की अनुपालना न करना ही उल्लेखित किया है।

विधायक ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

नाचन के विधायक विनोद कुमार ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। यह उनका राजनीतिक आरोप है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, विभागीय आदेश में निलंबन के प्रशासनिक आधार के रूप में उच्च प्राधिकारी के वैध निर्देशों की अनुपालना न करने की बात दर्ज है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

अब विभागीय प्रक्रिया पर रहेगी नजर

निलंबन आदेश सामने आने के बाद अब पूरे मामले में विभागीय जांच और अनुशासनात्मक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में उस विशिष्ट निर्देश का पूरा विवरण सामने नहीं आया है, जिसकी अनुपालना न करने को कार्रवाई का आधार बताया गया है। इसलिए आगे की विभागीय कार्रवाई में संबंधित घटनाक्रम, अधिकारी का पक्ष और उपलब्ध रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आधिकारिक तौर पर इतना स्पष्ट है कि पवन कुमार को गोहर के बीडीओ पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय शिमला निर्धारित किया गया है।