➤ सरकारी और निजी स्कूलों में प्री-नर्सरी एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी
➤ 3 से 6 साल के बच्चों को दाखिला देने वाले संस्थानों पर लागू होगा नियम
➤ सरकार समेत प्रतिवादियों से 4 सप्ताह में जवाब मांगा
शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्री-नर्सरी कक्षाओं में बच्चों के दाखिले को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में 3 से 6 साल की उम्र के बच्चों को प्री-नर्सरी में दाखिला देने के लिए संबंधित संस्थान का कानून के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। जिन संस्थानों का आवश्यक पंजीकरण नहीं हुआ है, वे फिलहाल प्री-नर्सरी कक्षाओं में दाखिला नहीं दे सकेंगे।
यह आदेश हिमाचल प्रदेश प्री-स्कूल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप शर्मा ने की। याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने अदालत के समक्ष आरोप लगाया कि प्रदेश में कुछ संस्थान आवश्यक पंजीकरण के बिना ही प्री-नर्सरी कक्षाएं चला रहे हैं और बच्चों को दाखिला दे रहे हैं।
3 से 6 साल के बच्चों के दाखिले पर लागू होगा नियम
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदेश अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन सेंटर्स एक्ट और इसके तहत बनाए गए नियमों का उल्लेख किया। अदालत के समक्ष बताया गया कि संबंधित एक्ट 17 नवंबर 2018 को लागू हुआ था, जबकि इसके तहत बनाए गए नियम 17 मार्च 2026 से प्रभावी हैं।
इन प्रावधानों के तहत 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को प्री-नर्सरी में दाखिला देने वाले शैक्षणिक संस्थानों का संबंधित कानून के तहत पंजीकृत होना जरूरी है। यानी केवल कक्षा चलाने या बच्चों को दाखिला देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संस्थान को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण कराना होगा।
बिना रजिस्ट्रेशन एडमिशन देने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि राज्य में कई संस्थान आवश्यक पंजीकरण के बिना प्री-नर्सरी में दाखिले दे रहे हैं। एसोसिएशन ने इसे संबंधित कानून और नियमों का उल्लंघन बताया।
अदालत ने उपलब्ध कानून और नियमों पर विचार करने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता की दलील में प्रथम दृष्टया आधार दिखाई देता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि प्री-नर्सरी में दाखिले संबंधित एक्ट और नियमों के प्रावधानों के अनुसार ही किए जाएंगे।
सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस
मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
आगे की सुनवाई में अदालत इस मामले से जुड़े कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। फिलहाल अंतरिम आदेश के तहत बिना आवश्यक पंजीकरण वाले संस्थानों के लिए प्री-नर्सरी दाखिले को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
शिमला के नामी स्कूल भी याचिका में प्रतिवादी
इस मामले की खास बात यह है कि याचिका में शिमला के कुछ नामी स्कूलों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई में इन संस्थानों की ओर से दाखिले और पंजीकरण से जुड़े पक्ष भी सामने आ सकते हैं।
मामले में अदालत का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है। फिलहाल हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश प्री-नर्सरी स्तर पर बच्चों के दाखिले और संस्थानों के कानूनी पंजीकरण को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभिभावकों के लिए क्या मायने
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्री-नर्सरी में बच्चे का दाखिला कराने वाले अभिभावकों के लिए भी स्कूल के पंजीकरण की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के दाखिले के मामले में संबंधित संस्थान निर्धारित कानून और नियमों का पालन कर रहा है या नहीं, यह जांचना जरूरी होगा।
मामले में सरकार और अन्य प्रतिवादियों के जवाब के बाद अदालत आगे की स्थिति स्पष्ट करेगी। फिलहाल बिना आवश्यक पंजीकरण वाले संस्थानों में प्री-नर्सरी दाखिले को लेकर हाईकोर्ट ने अंतरिम स्तर पर रोक जैसी स्थिति स्पष्ट की है।



