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हिमाचल की पंचायतें अब खरीद सकेंगी 3 लाख रुपये तक का फर्नीचर, 16वें वित्त आयोग की अनटाइड ग्रांट से होगा भुगतान

➤ ग्राम पंचायतों को फर्नीचर खरीदने की मिली औपचारिक मंजूरी
➤ अनटाइड ग्रांट से अधिकतम 3 लाख रुपये तक हो सकेगी खरीद
➤ खरीद में वित्तीय नियमों और पंचायती राज प्रावधानों का पालन जरूरी


हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों के लिए कार्यालय सुविधाओं से जुड़ी एक अहम राहत सामने आई है। पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनटाइड ग्रांट से अधिकतम 3 लाख रुपये तक का कार्यालय फर्नीचर खरीदने की अनुमति दे दी है। विभाग ने इस संबंध में औपचारिक स्वीकृति जारी करने के साथ प्रदेश के सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। अब ग्राम पंचायतें अपनी कार्यालय जरूरतों के लिए आवश्यक फर्नीचर की खरीद अनटाइड ग्रांट की राशि से कर सकेंगी। हालांकि, इसके लिए अधिकतम सीमा 3 लाख रुपये निर्धारित की गई है और खरीद की पूरी प्रक्रिया को निर्धारित वित्तीय नियमों तथा हिमाचल प्रदेश पंचायती राज नियम, 2002 में तय प्रावधानों के अनुसार पूरा करना अनिवार्य होगा।

अनटाइड ग्रांट से होगी फर्नीचर की खरीद

विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ग्राम पंचायत कार्यालयों में उपयोग होने वाले आवश्यक फर्नीचर की खरीद अब अनटाइड ग्रांट से की जा सकती है। इस राशि का इस्तेमाल पंचायत कार्यालयों की जरूरत के मुताबिक फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकेगा।

हालांकि, विभाग ने खरीद की अधिकतम सीमा 3 लाख रुपये तय की है। यानी पंचायतें इस मद में निर्धारित सीमा से अधिक राशि खर्च नहीं कर सकेंगी।

पंचायत भवनों में सुविधाएं बढ़ाने में मिलेगी मदद

इस निर्णय से प्रदेश की ग्राम पंचायतों में बुनियादी कार्यालय सुविधाएं मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कई पंचायत कार्यालयों में कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों के कामकाज के लिए जरूरी फर्नीचर की आवश्यकता रहती है। अब अनटाइड ग्रांट के माध्यम से ऐसी जरूरतों को पूरा करने का रास्ता स्पष्ट हो गया है।

इससे पंचायत कार्यालयों में कामकाज के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान हो सकती है, लेकिन खर्च की सीमा और निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।

वित्तीय नियमों का पालन करना अनिवार्य

पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्नीचर खरीद की प्रक्रिया निर्धारित वित्तीय नियमों के तहत ही पूरी करनी होगी। पंचायतों को हिमाचल प्रदेश पंचायती राज नियम, 2002 में निर्धारित प्रावधानों, शर्तों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करना होगा।

खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनदेखी या औपचारिक प्रक्रिया में लापरवाही को मान्य नहीं माना जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनटाइड ग्रांट की राशि का इस्तेमाल तय नियमों और निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप ही किया जाए।

जिला पंचायत अधिकारियों और बीडीओ को निर्देश

विभाग ने प्रदेश के सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके जरिए पंचायत स्तर पर फर्नीचर खरीद की प्रक्रिया को नियमों के अनुसार संचालित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और पंचायतों पर रहेगी।

कांगड़ा के जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने निदेशालय की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से जारी प्रावधानों के तहत पंचायतें निर्धारित सीमा के भीतर कार्यालय फर्नीचर की खरीद कर सकती हैं।

तीन लाख रुपये की सीमा का रखना होगा ध्यान

नई अनुमति के तहत पंचायतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त 3 लाख रुपये की अधिकतम सीमा है। अनटाइड ग्रांट से कार्यालय फर्नीचर की खरीद करते समय इस सीमा का पालन करना होगा। साथ ही खरीद से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया, वित्तीय नियम और पंचायती राज नियमों के प्रावधान लागू रहेंगे।

इस फैसले के बाद पंचायतों के पास अपने कार्यालयों की आवश्यकताओं के अनुसार फर्नीचर उपलब्ध कराने का एक अतिरिक्त वित्तीय विकल्प होगा। हालांकि, राशि खर्च करने से पहले निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य रहेगा।