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हिमाचल में इस बार महंगा मिलेगा सेब, उत्पादन में आई भारी गिरावट

➤ हिमाचल में इस बार 20 हजार मीट्रिक टन कम हुआ सेब का उत्पादन

➤ जलवायु परिवर्तन और बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से फसल प्रभावित

➤ बाजार में आवक घटने से इस साल महंगा मिल सकता है सेब


हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब की फसल पिछले सीजन के मुकाबले करीब 20 हजार मीट्रिक टन कम दर्ज की गई है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में इसकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और लोगों को सेब काफी महंगा मिल सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक बाजार में 3.87 लाख मीट्रिक टन सेब पहुंचा है, जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि तक 4.07 लाख मीट्रिक टन सेब पहुंच चुका था। उत्पादन में आई इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य कारण खराब मौसम और जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है, जिसका असर साल-दर-साल बागवानी पर पड़ रहा है।

बागीचों में पैदावार घटने के पीछे सर्दियों के दौरान पर्याप्त बर्फबारी और बारिश न होने से चिलिंग ऑवर्स का पूरा न होना मुख्य वजह रही। इसके अलावा बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और मौसम की असमानता के कारण पौधों में फूल और फल बनने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई। इस बार फलों की ड्रॉपिंग भी अधिक देखने को मिली और सेब का सीजन सामान्य से करीब 15 दिन देरी से शुरू हुआ। स्थिति केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में भी हालात खराब हैं जहाँ उत्पादन में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी का कहना है कि जलवायु परिवर्तन आज एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है, जिससे निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों और हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिमाचल की आर्थिकी में सेब उद्योग करीब 5,000 करोड़ रुपये का महत्व रखता है। उत्पादन घटने से न केवल आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा, बल्कि ढुलाई, पैकिंग, मजदूरी और मंडी कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।