➤ शिमला से दिल्ली तक सियासी गलियारों में हड़कंप: सभी 68 सीटों पर बीजेपी का गुप्त सर्वे शुरू
➤ केंद्रीय हाईकमान ने कसी कमर: दिल्ली की चुनिंदा एजेंसी को सौंपी गई विनेबिलिटी परखने की कमान
➤ इक्तीस अक्टूबर की डेडलाइन तय: उम्मीदवारों की धड़कनें तेज, गोपनीय रिपोर्ट से तय होगा भविष्य
हिमाचल प्रदेश के सियासी मैदान में अभी से दो साल बाद होने वाले विधानसभा रण का शंखनाद हो चुका है और भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए एक ऐसा ब्रह्मास्त्र चला है जिसने अंदरखाने बड़े-बड़े दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कड़े निर्देशों के बाद, दिल्ली से भेजी गई एक विशेष और गोपनीय एजेंसी ने हिमाचल की सभी अड़सठ विधानसभा सीटों पर ‘टॉप सीक्रेट’ सर्वे का जाल बिछा दिया है।
इस चौंकाने वाले राजनीतिक पैंतरे के तहत एजेंसी पिछले दो महीनों से राज्य के चप्पे-चप्पे पर घूमकर हर सीट का कच्चा-चिट्ठा तैयार कर रही है और अब तक अड़तालीस से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में इस मिशन को अंजाम भी दिया जा चुका है। इस हाई-वोल्टेज कवायद का एकमात्र मकसद किसी भी बाहरी दबाव या भाई-भतीजावाद से दूर रहकर हर संभावित उम्मीदवार की ‘विनेबिलिटी’ यानी चुनाव जीतने की वास्तविक क्षमता और उसकी जमीनी पकड़ का दूध का दूध और पानी का पानी करना है।
इस राजनीतिक महाभारत में टिकट के दावेदारों के लिए यह सर्वे किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। रिपोर्ट तैयार करने वाली केंद्रीय टीम सीधे तौर पर ग्राउंड जीरो पर उतरकर पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और आम जनता के बीच जाकर यह टटोल रही है कि किस चेहरे के नाम पर जनता मुहर लगाने को तैयार है और कौन हवा हवाई साबित हो रहा है। खास तौर पर उन सीटों पर जहां पिछले चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था या जहां कांग्रेस के बागी और निर्दलीय विधायक पाला बदलकर खेमे में आए हैं, वहां टिकट के लिए दावेदारों की बाढ़ आई हुई है और हर कोई अपनी ताकत दिखाने में जुटा है। दिल्ली की इस एजेंसी को अपना पहला चरण मुकम्मल करने के लिए इक्तीस अक्टूबर तक की सख्त डेडलाइन थमाई गई है, जिसके बाद यह रिपोर्ट सीधे केंद्रीय हाईकमान के दरबार में पेश होगी और फिर दस नवंबर से दूसरे चरण का ऐसा महा-सर्वे शुरू होगा जो सीधे तौर पर सिर्फ और सिर्फ जिताऊ और दमदार चेहरों पर ही केंद्रित होगा।



