➤ हाईकोर्ट का कड़ा आदेश: अनुबंध सेवाओं को वरिष्ठता, पदोन्नति और पेंशन के लिए जोड़ने पर अट्ठाइस नवंबर तक फैसला करे सरकार
➤ याचिकाकर्ता यशिका गुलेरिया की अवमानना याचिका पर न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत का अहम फैसला
➤ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए शिक्षा निदेशक ने कोर्ट में दाखिल किया अनुपालन हलफनामा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों की सेवाओं को नियमितीकरण के बाद उनकी वरिष्ठता, पदोन्नति, इंक्रीमेंट और पेंशन लाभ के लिए जोड़ने के मामले में आगामी 28 नवंबर तक अंतिम निर्णय लिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सक्षम प्राधिकारी तय तारीख या उससे पहले हर हाल में पंद्रह दिसंबर दो हजार तेईस के मूल फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करें।
हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण आदेश से प्रदेश के हजारों ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है जो अनुबंध काल पूरा करने के बाद नियमित हुए हैं। यह आदेश न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता यशिका गुलेरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया है, जो राज्य सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा अदालत में दाखिल किए गए उस हलफनामे के बाद आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की अपील खारिज किए जाने की बात स्वीकार की गई है।
इससे पहले पंद्रह दिसंबर दो हजार तेईस को हाईकोर्ट ने यशिका गुलेरिया और अन्य कर्मचारियों के मामले में यह आदेश दिया था कि उनकी अनुबंध अवधि की सेवाओं को वरिष्ठता और अन्य वित्तीय लाभों के लिए काउंट करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। हालांकि, अदालत के आदेश के बावजूद जब सरकार की ओर से समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो याचिकाकर्ताओं को अवमानना याचिका का रास्ता अपनाना पड़ा, जिसके जवाब में शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश सेवा भर्ती एवं शर्तें अधिनियम दो हजार चौबीस का हवाला देकर इन दावों को खारिज करने का प्रयास किया था। इसी तरह के एक अन्य मामले (देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार) में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ इसी साल उनतीस जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने सरकार की विशेष अनुमति याचिका को सिरे से खारिज करते हुए चार महीने के भीतर आदेश लागू करने के निर्देश दिए थे। उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा दिए गए हलफनामे के बाद अब हाईकोर्ट ने सरकार की इस अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड पर लेते हुए अवमानना कार्यवाही को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है।



