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नए जिलों के गठन का प्रस्ताव चुनावी मुद्दा नहीं, व्यवस्था परिवर्तन का हिस्सा

  • हिमाचल में नए जिलों के गठन का प्रस्ताव कोई चुनावी स्टंट नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की पहल

  • रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित आयोग की सिफारिशों पर तय होगी नए जिलों, तहसीलों व ब्लॉकों की रूपरेखा

  • जदरांगल सीयू कैंपस के लिए राज्य सरकार तुरंत 20 करोड़ देने को तैयार, बिजली-पानी का खर्च उठाए केंद्र


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने धर्मशाला प्रवास के दौरान स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नए जिलों के गठन का प्रस्ताव कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। यह कदम प्रशासनिक सुगमता और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं व सेवाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के मकसद से उठाया जा रहा है। सरकार का मुख्य ध्येय ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के जरिए प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को जमीन पर उतारना है, ताकि आमजन को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूर स्थित जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नए जिलों के पुनर्गठन को लेकर कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी के बाद एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन कर दिया गया है। इस आयोग में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और लैंड रिकॉर्ड्स के निदेशक सहित अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। आयोग जमीनी जरूरतों, भौगोलिक परिस्थितियों और जनता की सहूलियत का गहन अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। उसी सिफारिश के आधार पर तय होगा कि किन क्षेत्रों को जिला, ब्लॉक या नई तहसील का दर्जा देने की आवश्यकता है।

विपक्ष पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दिन में सपने देख रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव हर पांच साल बाद होते हैं, ऐसे में प्रशासनिक सुधारों को चुनाव से जोड़कर देखना पूरी तरह निराधार है। उन्होंने केंद्र सरकार पर प्रदेश के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और केंद्रीय वित्तीय सहायता के संदर्भ में हकीकत जनता के सामने है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों का जिक्र करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से प्रदेश में पीजी की महज 227 सीटें थीं, जिन्हें वर्तमान सरकार ने साढ़े तीन साल में बढ़ाकर 320 तक पहुंचाया है। अकेले टांडा मेडिकल कॉलेज में पीजी की 57 नई सीटें मंजूर हुई हैं और वहां स्वास्थ्य सुविधाओं में 60 प्रतिशत तक बड़ा सुधार किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं को शत-प्रतिशत आधुनिक बनाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।

कांगड़ा जिले को प्रदेश की ‘पर्यटन राजधानी’ बनाने के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि धर्मशाला को एक बड़े पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन की मेजबानी इसी कड़ी का हिस्सा है और आने वाले समय में यहां उत्तर क्षेत्र (नॉर्थ जोन) का एक बड़ा अधिवेशन भी आयोजित किया जाएगा। इससे स्थानीय होटल उद्योग, टैक्सी ऑपरेटरों और युवाओं के स्वरोजगार को नई दिशा मिलेगी।

जदरांगल में प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय (CU) के निर्माण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस परियोजना के लिए तुरंत 20 करोड़ रुपये जारी करने के लिए तैयार है, बशर्ते बिजली और पानी का खर्च केंद्र सरकार वहन करे। केंद्र की ओर से औपचारिक पत्र मिलते ही यह राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देहरा कैंपस के लिए राज्य सरकार ने पहले ही बिजली और पानी का खर्च वहन किया है और वहां आवश्यक अनुमोदन मिलते ही परिसर का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।