नगरोटा हेल्पिंग हैंड्स ने साढ़े पांच साल में पूरी की 100 गरीब बेटियों की शादी की धाम सेवा
संस्था अब तक 257 जरूरतमंद परिवारों पर खर्च कर चुकी है 84.25 लाख रुपये की सहायता राशि
इलाज, शिक्षा, एंबुलेंस सहित सऊदी से युवक की वतन वापसी में भी निभाई है ऐतिहासिक भूमिका
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला स्थित नगरोटा बगवां के प्रमुख समाजसेवी संगठन नगरोटा हेल्पिंग हैंड्स (एनएचएच) ने समाज सेवा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सहयोग के लिए शुरू की गई इस संस्था ने अपने गठन के महज साढ़े पांच वर्षों के भीतर 100 निर्धन बेटियों के विवाह समारोह में धाम सेवा (प्रीतिभोज) उपलब्ध करवाने का पुनीत कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है।

गौरतलब है कि समाजसेवी प्रवेश शर्मा ने 28 जून 2021 को इस सेवा संस्था की नींव रखी थी। संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े असहाय लोगों तक सीधी और पारदर्शी मदद पहुंचाना रहा है। देखते ही देखते सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से देश-विदेश में बैठे दानी सज्जन इस नेक मुहिम से जुड़ते चले गए। समाजसेवियों और दानदाताओं के निस्वार्थ सहयोग की बदौलत आज संस्था ने 100 बेटियों की शादी में धाम की व्यवस्था का गौरवपूर्ण आंकड़ा छू लिया है।

नगरोटा हेल्पिंग हैंड्स की सेवा केवल शादियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि संकट में घिरे लोगों के लिए यह संस्था एक मजबूत सहारा बनी है। संस्था द्वारा अब तक कुल 257 गंभीर मामलों में 84 लाख 25 हजार रुपये की सीधी वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसमें आपातकालीन एंबुलेंस सुविधा, गंभीर बीमारियों की दवाइयां, बड़े ऑपरेशन, किडनी ट्रांसप्लांट और डायलिसिस के मरीजों की निरंतर मदद शामिल है। ठारू गांव की बेटी पायल के जटिल लिवर ट्रांसप्लांट का मामला हो या फिर सिहुंड गांव का चर्चित साक्षी केस, संस्था ने हर कठिन मोड़ पर आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

इसके अलावा संस्था ने निर्धन और अनाथ बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस भरने, आगजनी से तबाह हुए परिवारों को पुनः बसाने और कठिन सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में भी अहम भूमिका निभाई है। संस्था की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रौंखर निवासी विजय कुमार की 11 साल बाद सऊदी अरब से घर वापसी का मामला भी दर्ज है, जिसे संस्था के अथक प्रयासों से सुलझाया गया था। संस्थापक प्रवेश शर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय भगवान श्री हरि विष्णु की अनुकंपा और संगठन से जुड़े तमाम समर्पित दानदाताओं को दिया है।



