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कसौली में अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई पर अधिकारी तलब, रिपोर्ट में देरी पर हाईकोर्ट नाराज

➤ कसौली में कथित अवैध निर्माण और चीड़ के पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारी को किया तलब

➤ 28 सितंबर के आदेश के बाद भी निरीक्षण और संयुक्त रिपोर्ट में देरी पर अदालत ने जताई नाराजगी

➤ वरिष्ठ नागरिक की ईमेल पर लिया था संज्ञान, अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी


शिमला। हिमाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र कसौली में कथित अवैध निर्माण और चीड़ के पुराने पेड़ों की कटाई का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। सोलन जिले के इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई में देरी पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई पर प्रासंगिक रिकॉर्ड के साथ अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि आदेश जारी होने के बावजूद मौके का निरीक्षण समय पर क्यों नहीं किया गया और संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट रिकॉर्ड पर क्यों नहीं रखी गई।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने 26 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान कसौली के एसडीएम के रवैये पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। अदालत के अनुसार, 28 सितंबर को आदेश पारित होने के बावजूद 16 अक्तूबर 2026 तक मौके का निरीक्षण नहीं किया गया था। इसके साथ ही संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट भी अदालत के रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं की गई।

रिपोर्ट में देरी पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि मामले में तहसीलदार कसौली, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर परवाणू और खंड विकास अधिकारी धर्मपुर से बार-बार रिपोर्ट मांगी गई, जिससे अनावश्यक देरी हुई। अदालत का कहना था कि निर्माण करने वाले व्यक्ति से सीधे संबंधित अनुमतियों का सत्यापन किया जा सकता था।

अदालत ने इस देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई के दौरान आवश्यक रिकॉर्ड के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित की गई है।

वरिष्ठ नागरिक की ईमेल पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

इस मामले का संज्ञान एक वरिष्ठ नागरिक की ओर से भेजी गई ईमेल के आधार पर लिया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कसौली में पास ही स्थित वुडविला संपत्ति पर कथित तौर पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक, निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी और कंक्रीट मिक्सर जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर खुदाई की गई।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में कई साल पुराने चीड़ के पेड़ काट दिए गए। साथ ही आशंका जताई कि पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचने से उनके रिहायशी मकान की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से वैध अनुमति नहीं ली गई थी।

अब अगली सुनवाई पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट के सामने फिलहाल मुख्य सवाल प्रशासनिक निरीक्षण में हुई देरी, संयुक्त रिपोर्ट की अनुपस्थिति और निर्माण से संबंधित अनुमतियों के सत्यापन का है। अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड और मामले में हुई कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि, कथित अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई और अनुमति नहीं होने से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत के आदेश या संबंधित जांच के निष्कर्षों से ही होगी। फिलहाल हाईकोर्ट ने रिपोर्ट में देरी पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारी को रिकॉर्ड सहित पेश होने का निर्देश दिया है।