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यूजीसी नियमों का विरोध में सचिवालय पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल, हंगामा

शिमला सचिवालय के बाहर यूजीसी नियमों पर उग्र प्रदर्शन, पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तीखी झड़प

वाटर कैनन और हल्के बल प्रयोग के बीच फेंके गए डंडे व क्रेट, चार घंटे ठप रहा सर्कुलर रोड

करणी सेना अध्यक्ष मकराना बोले- 10 जनवरी को दिल्ली कूच कर राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन


हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर जमकर बवाल हुआ। छोटा शिमला सचिवालय के बाहर स्वर्ण समाज, राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी और राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को सचिवालय की ओर बढ़ने से रोकने के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और पुलिस व कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया गया।

भीड़ का रुख इस कदर आक्रामक था कि पानी की बौछारों के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इस दौरान कुछ उग्र तत्वों ने पुलिस बल पर प्लास्टिक के क्रेट और डंडे फेंकने शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारी सर्कुलर रोड पर लगे सुरक्षा बैरिकेड्स और गेट को धकेलते हुए सीधे सचिवालय के मुख्य द्वार तक जा पहुंचे और बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। वहां कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया, जबकि हाथों में भगवा झंडा लिए कई युवक खड़ी बसों व निजी गाड़ियों की छतों पर चढ़ गए। हंगामे की सूचना मिलते ही पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन लिया।

इस उग्र विरोध-प्रदर्शन के कारण शिमला शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाले सर्कुलर रोड पर वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई। करीब चार घंटे तक मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लगा रहा, जिसके चलते सैकड़ों निजी वाहन और सरकारी बसें फंसी रहीं तथा आम जनता व पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को मनाली से इस विरोध यात्रा का आगाज हुआ था, जो सोलन में मशाल जुलूस के बाद गुरुवार को शिमला पहुंची थी।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका तर्क है कि इन नियमों में झूठी शिकायतों से बचाव और निष्पक्ष जांच के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिससे निर्दोष छात्रों को निशाना बनाए जाने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो 10 जनवरी को दिल्ली कूच कर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा और देशभर में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा।