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खबर हटके: आपके फोन पर चुकाए जीएसटी से सरकार को 3 लाख करोड़

➤ आपके फोन की खरीद पर चुकाए जीएसटी से सरकार को मिले 3 लाख करोड़ रुपये
➤ 19,000 करोड़ की पीएलआई सब्सिडी के बदले कुल 3.25 लाख करोड़ की वसूली का दावा
➤ मोबाइल विनिर्माण में 12 लाख को रोजगार, आयात 75 प्रतिशत से घटकर 0.02 प्रतिशत


नई दिल्ली। जो मोबाइल फोन आप और हम खरीदते हैं, उसी पर चुकाए गए टैक्स को आधार बनाकर सरकार ने पीएलआई योजना को सही ठहराया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को एक्स पर आंकड़े साझा कर बताया कि सरकार ने मोबाइल उद्योग को योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया। इसके बदले उसे लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मिला। यानी कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आए।

इस रकम का सबसे बड़ा हिस्सा जीएसटी का है, जो मोबाइल फोन खरीदते समय उपभोक्ता के बिल में जुड़कर आता है। इस तरह देश के आम खरीदारों की जेब से आया टैक्स ही सरकार के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क बनकर सामने आया है।

आंकड़ों के साथ मंत्री ने रोजगार का भी हवाला दिया। वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जबकि अकेले मोबाइल विनिर्माण में 12 लाख लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में “Cope harder” भी लिखा। यह पोस्ट एक मीडिया ओपिनियन वीडियो के जवाब में आई, जिसमें सब्सिडी के जरिये इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की भारत की कोशिश की कमियां गिनाई गई थीं। वीडियो में इसकी तुलना चीन के इकोसिस्टम से की गई।

वीडियो में दावा किया गया कि करदाताओं के पैसे से सब्सिडी पाकर बने तैयार मोबाइल फोन के निर्यात से जितनी कमाई होती है, उससे ज्यादा खर्च कलपुर्जों के आयात पर हो जाता है।

सरकार के मार्च में साझा किए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में बिकने वाले फोन अब लगभग पूरी तरह घरेलू स्तर पर बन रहे हैं। वर्ष 2024-25 में घरेलू मांग के मुकाबले मोबाइल फोन का आयात घटकर करीब 0.02 प्रतिशत रह गया, जो 10 साल पहले 75 प्रतिशत था। भारत ने वित्त वर्ष 2025 में 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात भी किया।

इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन 2014-15 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से छह गुना बढ़कर 2024-25 में लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये पहुंचा है। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी 10 साल पहले के 0.38 लाख करोड़ रुपये से आठ गुना बढ़कर करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

अब सरकार ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है, जिसके तहत कुल 62,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन तय किया गया है। योजना में ऐसे भारतीय स्मार्टफोन विकसित करने की परिकल्पना है, जिनका डिजाइन और निर्माण देश में ही होगा। वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड का लक्ष्य हासिल करने के लिए अक्टूबर 2028 की समयसीमा तय की है।

हालांकि, मंत्री की ओर से साझा किए गए आंकड़े कर, रोजगार, उत्पादन और निर्यात से जुड़े हैं। वीडियो में उठाए गए कलपुर्जों के आयात पर होने वाले खर्च का अलग से ब्योरा इन आंकड़ों में नहीं दिया गया है।