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सेना के लिए ड्रोन और 3.5 करोड़ की ग्रांट का दावा निकला झूठा, पुलिस ने दर्ज किया केस

➤ ड्रोन के लिए 3.5 करोड़ की ग्रांट का दावा झूठा, हमीरपुर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का केस किया दर्ज

➤ DIO ने X पर खबरों को बताया फेक, पत्र में कहा छात्र या उसके स्टार्टअप को नहीं मिली कोई ग्रांट

➤ BNS और IT एक्ट की धाराओं में FIR, छात्र सर्वेश शर्मा PGI चंडीगढ़ में उपचाराधीन


शिमला। भारतीय सेना के लिए हाईटेक ड्रोन बनाने और इसके लिए 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलने के दावे से चर्चा में आए हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के मामले में पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के प्रिंसिपल की शिकायत पर सदर थाना में FIR दर्ज की गई है।

पुलिस के अनुसार छात्र को डिजिटल माध्यम से ऐसे संदेश भेजे गए, जिनसे उसे विश्वास हो गया कि उसके ‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ प्रोजेक्ट के लिए डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) की iDEX पहल के तहत 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर हो गई है। हालांकि अक्टूबर 2026 में DIO से मिले आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया कि संस्था के रिकॉर्ड के अनुसार न तो छात्र को और न ही उससे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर की गई थी। पुलिस ने 29 अक्तूबर को जारी प्रेस नोट में इसे कथित तौर पर सुनियोजित ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला बताया है। छात्र फिलहाल PGI चंडीगढ़ में उपचाराधीन है। डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन ने अपने X अकाउंट पर ₹3.5 करोड़ की मंजूरी को लेकर पहले प्रकाशित खबरों के स्क्रीनशॉट साझा कर खबर को फेक बताया है।

हमीरपुर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 319 और 336(3) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत केस दर्ज किया है। शिकायत कॉलेज के प्रिंसिपल ने दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छात्र को ग्रांट मंजूर होने का भरोसा दिलाने के लिए किस तरह के डिजिटल संदेश भेजे गए और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। पुलिस के अनुसार मामले से जुड़े दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक पत्राचार और उपकरणों की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना और कथित धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।

सर्वेश शर्मा राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज बड़ू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं। इससे पहले मीडिया में प्रकाशित खबरों में दावा किया गया था कि वह सेना के लिए ‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नाम का ड्रोन विकसित कर रहे हैं, जिसे सीमा पर निगरानी के लिए उपयोगी बताया गया था। खबरों में प्रोजेक्ट के लिए 3.5 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर होने और इसे IIT रुड़की में विकसित किए जाने की जानकारी भी दी गई थी। ग्रांट मिलने की खबरों के बाद सर्वेश चर्चा में आए थे। उनकी कथित उपलब्धि के लिए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। अब DIO के X अकाउंट पर पोस्ट में ग्रांट मंजूर होने से इनकार किए जाने के बाद मामले की जांच अहम हो गई है।

सर्वेश शर्मा बुधवार को कॉलेज हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया। उनकी चोटों से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट में छात्र के घायल होने की घटना का कारण नहीं बताया गया है। इसलिए इसे ग्रांट से जुड़े कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले से जोड़कर देखना अभी उचित नहीं होगा। हमीरपुर पुलिस ने आम लोगों और मीडिया से अपील की है कि वे मामले में अटकलें लगाने और बिना पुष्टि की जानकारी प्रसारित करने से बचें। पुलिस ने छात्र और उसके परिवार की निजता और सम्मान बनाए रखने की भी अपील की है।

पुलिस ने नागरिकों, विद्यार्थियों, इनोवेटर्स और शिक्षण संस्थानों को सलाह दी है कि सरकारी योजनाओं के तहत ग्रांट, चयन या वित्तीय सहायता मिलने से जुड़े संदेशों की संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कार्यालय से पुष्टि करें। खासकर रक्षा, शोध और नवाचार से जुड़ी संस्थाओं के नाम पर आने वाले संदेशों को बिना सत्यापन के सही न मानें। संदिग्ध साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930, आपातकालीन सहायता नंबर 112 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर की जा सकती है। पुलिस के अनुसार समय पर सत्यापन और तुरंत शिकायत दर्ज कराना ऐसी धोखाधड़ी से बचने के अहम उपाय हैं।

अब इस पूरे प्रकरण में कई सवालों के जवाब पुलिस जांच से मिलने की उम्मीद है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को लेकर छात्र को राज्यपाल और सांसद से सम्मानित करवाया गया, लेकिन ग्रांट की सत्यता की जांच किसी स्तर पर क्यों नहीं हुई। छात्र के घायल होने की परिस्थितियां क्या थीं, यह भी जांच में ही स्पष्ट हो पाएगा।

क्या है iDEX और ग्रांट की असली प्रक्रिया। iDEX (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) रक्षा मंत्रालय की पहल है, जिसके तहत स्टार्टअप, एमएसएमई और नवोन्मेषकों को रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों पर समाधान विकसित करने के लिए सहायता दी जाती है। इसका संचालन डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन करता है। ऐसी सहायता आमतौर पर घोषित चुनौतियों, आवेदन, मूल्यांकन और चयन की तय प्रक्रिया के बाद ही दी जाती है। किसी भी ग्रांट की पुष्टि संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, सरकारी ईमेल डोमेन और अधिकृत कार्यालय से ही करना सुरक्षित तरीका है।

फर्जी ग्रांट या स्कॉलरशिप संदेश की ऐसे करें पहचान। अचानक आया ऐसा संदेश, जिसमें बड़ी राशि मंजूर होने की बात हो और आपने उसके लिए आवेदन ही न किया हो, संदिग्ध माना जाना चाहिए। प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी या सिक्योरिटी के नाम पर पैसे मांगना, जल्दबाजी का दबाव बनाना, निजी ईमेल या व्हाट्सऐप से भेजे गए पत्र और संदिग्ध लिंक ठगी के आम संकेत हैं। ऐसे संदेश में बैंक विवरण, ओटीपी या पासवर्ड कभी साझा न करें। संदेश के स्क्रीनशॉट और भेजने वाले का नंबर या ईमेल सुरक्षित रखें और तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

संस्थानों के लिए सीख। किसी विद्यार्थी की उपलब्धि को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करने या प्रचारित करने से पहले संबंधित एजेंसी से लिखित पुष्टि लेना जरूरी है। कॉलेज और सम्मान समारोह के आयोजक यदि दावों के सत्यापन की प्रक्रिया तय करें तो विद्यार्थियों को भी ऐसी स्थिति से बचाया जा सकता है।