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हिमाचल में दो फार्मा कंपनियों से प्रतिबंधित दवाएं मिलने के बाद एनसीबी ने 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज कीं

➤ कालाअंब की दो फार्मा कंपनियों से प्रतिबंधित दवाएं मिलने के बाद एनसीबी ने 20.10 करोड़ की 25 संपत्तियां फ्रीज कीं

➤ फर्जी फर्मों के नाम पर हो रही थी सप्लाई, सात राज्यों तक फैला था नेटवर्क

➤ नई दिल्ली के सक्षम प्राधिकारी ने 31 अक्तूबर को फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि की


हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग से जुड़े अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। सिरमौर के कालाअंब की दो फार्मा कंपनियों से प्रतिबंधित दवाओं की बरामदगी के बाद जांच में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई का खुलासा हुआ है। एनसीबी ने इस कमाई से बनाई गई 20.10 करोड़ रुपये की 25 संपत्तियां फ्रीज कर दी हैं।

नई दिल्ली के सक्षम प्राधिकारी ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68एफ(2) के तहत 2 अक्तूबर को जारी फ्रीजिंग आदेश की 31 अक्तूबर को पुष्टि कर दी। एनसीबी के अनुसार, कालाअंब स्थित मैसर्स डिजिटल विजन और मैसर्स वेलिंटन हेल्थकेयर से प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाओं और कच्चे माल की बड़ी खेप बरामद की गई थी। जांच में सामने आया कि इन इकाइयों से फर्जी फर्मों के नाम पर दवाओं की सप्लाई की जा रही थी।

जांच में यह भी पता चला है कि यह नेटवर्क सात राज्यों तक फैला हुआ था। इनमें हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

एनसीबी की वित्तीय जांच के मुताबिक, दवाओं की बिक्री से अर्जित कमाई को कंपनियों के बैंक खातों में अलग-अलग लेनदेन के जरिए घुमाकर उसका स्रोत छिपाया गया। इसके बाद आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर 20.10 करोड़ रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं। आरोपी इन संपत्तियों की खरीद का कोई वैध आय स्रोत नहीं बता सके।

फ्रीज की गई संपत्तियों में मोहाली के गिलको इंडस्ट्रियल पार्क, सिटी सेंटर-3, सिटी सेंटर वॉक, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वीनस्टाउन की औद्योगिक-वाणिज्यिक इकाइयां और आवासीय फ्लैट शामिल हैं।

साइकोट्रोपिक दवाएं डॉक्टर की पर्ची के बिना लेना कानूनन अपराध है और सेहत के लिए बेहद खतरनाक भी। इनके दुरुपयोग से लत, याददाश्त और व्यवहार में बदलाव, सांस की गति धीमी होने और ओवरडोज से जान जाने तक का खतरा रहता है। दवा हमेशा लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से और पक्के बिल के साथ ही खरीदें। किसी मेडिकल स्टोर पर बिना पर्ची नशीली दवाएं बिकती दिखें या परिवार में किसी को ऐसी दवाओं की लत लगने का शक हो, तो एनसीबी की मानस हेल्पलाइन 1933 पर निःशुल्क संपर्क किया जा सकता है।