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हिमाचल में ऑनलाइन की जगह ऑफलाइन कागजी लॉटरी शुरू करने की तैयारी, संशोधित टेंडर जारी

➤ कंपनियां 20 नवंबर तक लगा सकेंगी बोली, टिकट की न्यूनतम कीमत 10 रुपये

➤ चयनित कंपनी देगी सालाना 10 करोड़ लाइसेंस फीस और टर्नओवर का 2 फीसदी हिस्सा


शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकार अब ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन कागजी लॉटरी शुरू करने की तैयारी में है। कोष, लेखा एवं लॉटरी विभाग ने संशोधित टेंडर जारी कर दिया है। कंपनियां 20 नवंबर तक बोली लगा सकेंगी। लॉटरी टिकट की न्यूनतम कीमत 10 रुपये होगी। प्रतिदिन 12 ड्रॉ निकालने की योजना है। हालांकि प्रत्येक ड्रॉ की पुरस्कार राशि अभी तय नहीं हुई है।

टेंडर की शर्तों के अनुसार चयनित कंपनी को सालाना 10 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस के रूप में सरकार को देने होंगे। इसके अलावा कंपनी अपने कुल टर्नओवर का दो फीसदी हिस्सा भी सरकार को देगी। कंपनी को प्रदेश में लॉटरी बिक्री के लिए एजेंट नियुक्त करने होंगे। टिकट कहां-कहां उपलब्ध होंगे, यह भी तय किया जाएगा।

टेंडर में कंपनियों के सुझावों के आधार पर बदलाव किए गए हैं। पहले ऑनलाइन लॉटरी चलाने की योजना थी, लेकिन अब कागजी लॉटरी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। अगले साल होली पर पहला बंपर ड्रॉ निकल सकता है। साल में फिलहाल तीन बंपर ड्रॉ निकालने की योजना है। हालांकि इनकी संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।

सरकार को कितनी हो सकती है आमदनी। टेंडर की शर्तों के मुताबिक सरकार को हर साल कम से कम 10 करोड़ रुपये की निश्चित लाइसेंस फीस मिलेगी। इसके अलावा बिक्री बढ़ने के साथ टर्नओवर के दो फीसदी हिस्से के रूप में अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी वर्ष कंपनी का टर्नओवर 500 करोड़ रुपये रहता है, तो सरकार को दो फीसदी के हिसाब से 10 करोड़ रुपये अलग से मिलेंगे। यह केवल गणना का उदाहरण है, वास्तविक टर्नओवर बिक्री पर निर्भर करेगा।

लॉटरी संचालन का कानूनी ढांचा। देश में लॉटरी का संचालन लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 और उसके तहत बने नियमों के दायरे में होता है। इसके तहत राज्य सरकारें अपनी लॉटरी चला सकती हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है। ड्रॉ की संख्या, पुरस्कार संरचना और बिक्री से जुड़े नियमों की पुष्टि संबंधित विभाग की अधिसूचना और टेंडर दस्तावेज से ही की जानी चाहिए।

जीतने पर टैक्स का नियम। लॉटरी से जीती गई राशि पर आयकर कानून के तहत 30 प्रतिशत की दर से कर लगता है और भुगतान के समय स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की जाती है। इसलिए पुरस्कार की घोषित राशि और हाथ में मिलने वाली राशि में अंतर रहता है। इसके साथ लागू उपकर और अधिभार अलग से हो सकते हैं।

लॉटरी खरीदने वाले इन बातों का रखें ध्यान। लॉटरी का टिकट केवल अधिकृत एजेंट या अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें और उसकी रसीद संभालकर रखें। टिकट पर ड्रॉ की तारीख, सीरीज और नंबर की जांच करें और परिणाम केवल आधिकारिक अधिसूचना से ही मिलाएं। लॉटरी को आय का साधन न समझें और अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च न करें, क्योंकि जीत की संभावना बेहद कम होती है। बार-बार टिकट खरीदने की आदत पर नियंत्रण न रहे तो परिवार के किसी सदस्य या काउंसलर से बात करना उचित रहता है।

फर्जी लॉटरी संदेशों से रहें सावधान। लॉटरी शुरू होने के साथ ठग भी सक्रिय हो सकते हैं। फोन, एसएमएस या व्हाट्सऐप पर आने वाले ऐसे संदेश, जिनमें लॉटरी जीतने का दावा हो और पुरस्कार पाने के लिए प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या बैंक विवरण मांगा जाए, ठगी के संकेत हैं। ऐसे संदेशों पर भरोसा न करें, किसी को ओटीपी या बैंक जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर की जा सकती है।