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हिमाचल के अस्पतालों में क्रस्ना लैब की हड़ताल, वेतन न मिलने से कर्मचारी नाराज, आईजीएमसी में सिर्फ आपातकालीन सैंपल,

➤ हिमाचल के सरकारी अस्पतालों में क्रस्ना लैब की हड़ताल, जांच के लिए भटक रहे मरीज

➤ आईजीएमसी शिमला में केवल आपातकालीन मरीजों के सैंपल लिए जा रहे

➤ खनेरी अस्पताल में 15 कर्मचारी हड़ताल पर, रोज 250 से ज्यादा मरीजों की मुफ्त जांच प्रभावित


हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में क्रस्ना लैब की हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जांच सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों को जरूरी टेस्ट करवाने के लिए निजी प्रयोगशालाओं के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में भी हड़ताल का असर साफ दिखाई दे रहा है। यहां केवल आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों के ही सैंपल लिए जा रहे हैं, जबकि सामान्य मरीजों को जांच करवाने में दिक्कतें आ रही हैं। अस्पतालों की सरकारी लैब में भी केवल कुछ ही प्रकार के टेस्ट किए जा रहे हैं। सभी जांचों की सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही और कई को मजबूरी में निजी प्रयोगशालाओं में जांच करवानी पड़ रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन मरीजों को है, जिन्हें डॉक्टरों ने जल्द जांच करवाने की सलाह दी है।

खनेरी अस्पताल में ठप हुई टेस्ट सुविधा

चार जिलों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले खनेरी अस्पताल में सोमवार को क्रस्ना लैब के कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। बताया गया है कि सरकार की ओर से कंपनी को समय पर अदायगी न किए जाने के कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है। इसके विरोध में अस्पताल में तैनात क्रस्ना लैब के करीब 15 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।

खनेरी अस्पताल में क्रस्ना लैब के माध्यम से रोजाना 250 से अधिक मरीजों को विभिन्न प्रकार के टेस्ट की निशुल्क सुविधा मिलती है। हड़ताल के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। हालांकि सुबह से दोपहर 12 बजे तक अस्पताल की सरकारी प्रयोगशाला में कुछ टेस्ट किए गए, लेकिन उसके बाद मरीजों को जांच में दिक्कतें आने लगीं और कई को निजी क्लीनिकों और लैबों का रुख करना पड़ा।

खनेरी अस्पताल रामपुर के साथ कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति सहित आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां दूरदराज से लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। टेस्ट सुविधा ठप होने से सामान्य जांचों के साथ विशेष रक्त जांच, हार्मोन, थायराइड, विटामिन और कैंसर संबंधी मार्कर जैसी जांचों के लिए भी मरीजों को निजी लैबों में जाना पड़ा। इससे गरीब तबके के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी।

जांच में देरी से इलाज में देरी न हो, इसके लिए कुछ बातें ध्यान रखें। डॉक्टर ने जो जांच जरूरी बताई है, उसे टालें नहीं और निजी लैब चुनते समय एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब को प्राथमिकता दें। रिपोर्ट के साथ पर्ची और बिल संभालकर रखें, क्योंकि कुछ मामलों में बाद में प्रतिपूर्ति या सरकारी योजनाओं में काम आ सकते हैं। अगर आपकी स्थिति गंभीर है, जैसे तेज बुखार, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ, तो आपातकालीन सेवा में तुरंत पहुंचें, क्योंकि वहां सैंपल लिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 104 और आपात स्थिति में 108 या 112 पर संपर्क किया जा सकता है।