➤ रामपुर के कांग्रेस विधायक नंद लाल का 72 वर्ष की आयु में निधन
➤ ITBP और SPG से जुड़े रहे नंद लाल ने लगातार चार चुनाव जीते
➤ निधन पर अंतरराष्ट्रीय लवी मेले की 3 और 4 नवंबर की गतिविधियां स्थगित
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति से मंगलवार सुबह एक दुखद खबर आई। शिमला जिले की रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल का 3 नवंबर 2026 को 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही रामपुर और पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
नंद लाल ने शिमला के चमियाणा स्थित अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान में सुबह करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच अंतिम सांस ली, जहां वे कई दिनों से भर्ती थे। यूएनआई की रिपोर्ट के अनुसार वे किडनी, प्रोस्टेट और रीढ़ से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे और अस्पताल के विशेष वार्ड में उनका उपचार चल रहा था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू उनका हालचाल जानने अस्पताल पहुंचे थे। मुख्यमंत्री सहित कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।
सरकारी सेवा से राजनीति तक का सफर। नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया। इसके बाद वे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में शामिल हुए और कमांडो दल से जुड़े। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आईटीबीपी की एक बटालियन की कमान संभाली और बाद में विशेष सुरक्षा समूह (SPG) में सेवाएं दीं। उग्रवाद से मुकाबले में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया था। सुरक्षा सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने कांग्रेस के माध्यम से राजनीति में कदम रखा।
लगातार चार जीत। नंद लाल ने 2007 में रामपुर से पहला चुनाव लड़ा और भाजपा प्रत्याशी बृज लाल को 6,470 मतों से हराया। 2012 में उन्होंने 9,471 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। 2017 में जीत का अंतर 4,037 मत रहा। 2022 में मुकाबला बेहद कड़ा रहा और वे केवल 567 मतों से जीते। इस तरह वे लगातार चार चुनाव जीतकर रामपुर का प्रतिनिधित्व करते रहे। रामपुर सीट पर उनकी पकड़ का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने डेढ़ दशक से अधिक समय तक इस क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
सरकार और सदन में अहम ज़िम्मेदारियां। विधायक बनने के बाद 2013 में उन्हें मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया। विधानसभा में वे अलग-अलग समितियों से जुड़े रहे। 2022 में चौथी बार जीतने के बाद उन्हें विधानसभा की कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। मार्च 2024 में सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं में गिना जाता था। मुख्यमंत्री सुक्खू ने उन्हें कांग्रेस के प्रति गहराई से समर्पित और अपने आदर्शों से कभी समझौता न करने वाला नेता बताया। उनके परिवार में पत्नी और पुत्र हैं।
रामपुर में शोक, लवी मेला स्थगित। उपमंडल प्रशासन रामपुर बुशहर ने नंद लाल के निधन को क्षेत्र और पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उपमंडलाधिकारी (नागरिक) हर्ष अमरेंद्र सिंह ने कहा कि वे अपने सार्वजनिक जीवन में क्षेत्र के विकास और समाज के प्रति समर्पित रहे। निधन के सम्मान में प्रशासन ने 3 और 4 नवंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय लवी मेला-2026 के तहत होने वाली पूर्व निर्धारित गतिविधियां स्थगित कर दी हैं। गौरतलब है कि लवी मेला रामपुर की पहचान और प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक मेलों में गिना जाता है।
विधायक के निधन से रामपुर सीट रिक्त हो गई है। नियमों के अनुसार रिक्त सीट पर निर्वाचन आयोग को सामान्यतः छह माह के भीतर उपचुनाव कराना होता है, बशर्ते विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से अधिक हो। उपचुनाव का कार्यक्रम चुनाव आयोग तय करेगा। अंतिम संस्कार की तिथि और स्थान की आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
60 वर्ष की आयु के बाद किडनी और प्रोस्टेट की नियमित जांच बेहद ज़रूरी मानी जाती है। पेशाब में रुकावट या जलन, बार-बार रात में पेशाब आना, पैरों में सूजन, लगातार कमर या रीढ़ में दर्द और थकान जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज़ साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट और ज़रूरत पड़ने पर PSA जांच डॉक्टर की सलाह से कराएं। सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग अक्सर व्यस्तता में अपनी सेहत की अनदेखी कर बैठते हैं, इसलिए समय पर इलाज और नियमित जांच ज़रूर कराएं।



