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 वन विभाग का आरओ 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

➤ भगानी में तैनात वन विभाग का आरओ सुमंत 10 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार

➤ यमुना से रेत ले जाने पर दो ट्रैक्टर जब्त करने की धमकी देकर मांगी थी घूस

➤ विजिलेंस ने नाहन थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में दर्ज किया मामला


पांवटा साहिब (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की मुहिम के तहत मंगलवार को एक और सरकारी कर्मचारी जाल में फंसा। यमुना नदी से रेत ले जाने के मामले में दो ट्रैक्टर जब्त करने की धमकी देकर 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में विजिलेंस की टीम ने भगानी में तैनात वन विभाग के आरओ सुमंत को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस अधीक्षक विजिलेंस एनके शर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 3 नवंबर को पुलिस थाना राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) नाहन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

शिकायत में क्या आरोप। गांव भगानी निवासी शिकायतकर्ता इकराम पुत्र इकबाल ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि आरओ सुमंत ने उसके बहनोई जुल्फान को यमुना नदी से रेत ले जाने पर दो ट्रैक्टर जब्त करने की धमकी दी थी। इसके बदले आरोपी ने उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायत मिलते ही विजिलेंस ने मामले की गोपनीय पड़ताल शुरू की।

जाल बिछाकर पकड़ा। एनके शर्मा के अनुसार शिकायत के आधार पर निरीक्षक मनोज कुमार की अगुवाई में विजिलेंस की टीम ने पांवटा साहिब में आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। इस दौरान जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है। फिलहाल आरोपी पर लगे आरोप जांच का विषय हैं और अदालत में दोष सिद्ध होने तक कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला आगे बढ़ेगा।

क्या कहता है कानून। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ की मांग या स्वीकार करने से जुड़ी है। 2018 के संशोधन के बाद इसमें दोष सिद्ध होने पर सामान्यतः तीन से सात वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद रिश्वत देना भी अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए नागरिकों को दबाव में आकर रकम देने की बजाय सीधे विजिलेंस से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

कैसे होता है “ट्रैप”। विजिलेंस किसी लोक सेवक के खिलाफ तभी जाल बिछाती है जब किसी व्यक्ति से रिश्वत की मांग की गई हो और वह शिकायत दर्ज कराए। शिकायत के सत्यापन के बाद गवाहों की मौजूदगी में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत नोट चिह्नित किए जाते हैं और रकम लेते ही आरोपी को पकड़ा जाता है। इसलिए शिकायतकर्ता का आगे आना ही ऐसी कार्रवाई की पहली शर्त है।

रिश्वत की मांग हो तो क्या करें। हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के टोल फ्री नंबर 1064, कंट्रोल रूम नंबर 0177-2629893 या व्हाट्सऐप नंबर 89887-00100 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत करते समय मांग की तारीख, अधिकारी का नाम-पद, मांगी गई रकम और काम का ब्योरा देना मददगार रहता है। कॉल रिकॉर्डिंग या संदेश उपलब्ध हों तो उन्हें सुरक्षित रखें।