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मिड टर्म चुनाव में बुरी तरह हारे ट्रंप

➤ अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का कब्जा, सीनेट में रिपब्लिकन ने गंवाईं सात सीटें

➤ टेक्सास, कंसास, आयोवा, ओहायो और मेन तक रिपब्लिकन गढ़ ढहे, चार राज्यों में गवर्नर भी बदले

➤ ईरान युद्ध, महंगाई और टैरिफ से नाराजगी, ट्रंप की स्वीकृति दर 38% और ओहायो में रामास्वामी की हार


विस्तार (डिटेल्ड न्यूज़)

वाशिंगटन/वर्ल्ड डेस्क। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। तीन नवंबर को हुए मतदान के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों, यानी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। अमेरिकी टीवी नेटवर्क और एपी की प्रोजेक्शन में भी डेमोक्रेट्स की दोनों सदनों में जीत बताई गई है। इसके साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले दो वर्षों से चला आ रहा रिपब्लिकन पार्टी का संसद पर नियंत्रण खत्म हो गया है।

यह चुनाव इसलिए भी अहम था, क्योंकि 2024 का राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रंप की पार्टी के पास राष्ट्रपति पद के साथ संसद के दोनों सदनों में भी बहुमत था। मध्यावधि नतीजों ने अब यह स्थिति पूरी तरह बदल दी है।

सीनेट में सात सीटों का नुकसान

चुनाव से पहले सीनेट में रिपब्लिकन के पास 53 सीटें थीं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें और उनके साथ खड़े दो निर्दलीय सदस्यों का समर्थन था। इस बार डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन से सात सीटें छीन लीं। शुरुआती घोषित नतीजों में डेमोक्रेटिक खेमे को 54 और रिपब्लिकन को 44 सीटें मिलीं। डेमोक्रेटिक खेमे में दो निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं। सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं और बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है।

प्रतिनिधि सभा में भी डेमोक्रेट्स को बहुमत

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुआ। बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी हैं और डेमोक्रेट्स ने यह आंकड़ा पार कर लिया है। शुरुआती आकलन में डेमोक्रेट्स को 228 और रिपब्लिकन को 139 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। कई सीटों पर मतगणना अभी जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़े बदल सकते हैं। इस जीत के साथ डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज के जनवरी 2027 में स्पीकर बनने का रास्ता साफ हो गया है। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले अश्वेत नेता हो सकते हैं।

इस बदलाव का सीधा असर ट्रंप के बाकी कार्यकाल पर पड़ेगा। अब उन्हें कानून बनाने, बजट पारित कराने और कई प्रशासनिक फैसलों को आगे बढ़ाने के लिए डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना होगा।

टेक्सास से मेन तक सात राज्यों में रिपब्लिकन को झटका

सीनेट चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत का सबसे अहम पहलू उन राज्यों में मिली सफलता रही, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

टेक्सास: डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन केन पैक्सटन को हराया। टेक्सास में 1988 के बाद पहली बार किसी डेमोक्रेट ने सीनेट चुनाव जीता है। पैक्सटन राज्य के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं और ट्रंप समर्थित नेताओं में गिने जाते थे। उनकी उम्मीदवारी को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद थे।

कंसास: डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल को हराया। कंसास ने 1932 के बाद पहली बार किसी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को सीनेट भेजा है। करीब 94 साल बाद हुए इस बदलाव को चुनाव के सबसे बड़े उलटफेरों में गिना जा रहा है। हैमिल्टन एक पादरी हैं और देश के बड़े मेथोडिस्ट चर्च से जुड़े रहे हैं।

आयोवा: जोश ट्यूरेक ने रिपब्लिकन एश्ले हिंसन को हराया। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने इस राज्य में अच्छी बढ़त हासिल की थी, इसलिए यह जीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नॉर्थ कैरोलिना: पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने रिपब्लिकन माइकल व्हाटली को हराकर एक और रिपब्लिकन सीट डेमोक्रेट्स के खाते में जोड़ दी।

ओहायो: शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन जॉन हस्टेड को हराकर सीनेट में वापसी की। ब्राउन पहले भी सीनेटर रह चुके हैं। यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा, क्योंकि ओहायो में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का राजनीतिक प्रभाव माना जाता है।

मेन: ट्रॉय जैक्सन ने पांच बार की सीनेटर और रिपब्लिकन की वरिष्ठ नेता सुसान कॉलिन्स को हराया। उनकी हार को रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका माना गया।

दक्षिण कैरोलिना: एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन डार्लिन ग्राहम को हराया। रिपोर्ट के अनुसार डार्लिन, दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन हैं और जुलाई में उनके निधन के बाद उन्हें इस सीट पर नियुक्त किया गया था। ट्रंप ने भी उनका समर्थन किया था, इसके बावजूद डेमोक्रेट्स ने यह सीट जीत ली। इनके अलावा जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ ने अपनी सीट बरकरार रखी और न्यू हैम्पशायर में क्रिस पप्पास ने भी जीत दर्ज की।

हाउस चुनाव में भी डेमोक्रेट्स की बड़ी वापसी

प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की जीत केवल बहुमत तक सीमित नहीं रही। पार्टी ने कई कड़े मुकाबले वाले क्षेत्रों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराया और कुछ राज्यों में लंबे समय से रिपब्लिकन के पास रही सीटें भी छीन लीं।

न्यू जर्सी की सातवीं सीट से रेबेका बेनेट ने रिपब्लिकन सांसद टॉम कीन जूनियर को हराया। पेंसिल्वेनिया की सातवीं सीट पर बॉब ब्रूक्स ने रयान मैकेंजी को शिकस्त दी, जबकि इसी राज्य की आठवीं सीट से पैगे कोगनेटी और दसवीं सीट से जेनेल स्टेलसन ने भी जीत हासिल की। केंटकी की छठी सीट से जैक डेम्बो ने राल्फ अल्वाराडो को हराया। विस्कॉन्सिन की पहली सीट से मिशेल बर्मन और तीसरी सीट से रेबेका कुक ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराया।

आयोवा की तीसरी सीट से सारा ट्रोन गैरीट, नॉर्थ कैरोलिना की 11वीं सीट से जेमी एगर और कोलोराडो की आठवीं सीट से मैनी रुटिनेल ने जीत दर्ज की। कैलिफोर्निया की पहली सीट से माइक मैकगायर और वर्जीनिया की दूसरी सीट से एलेन लुरिया भी डेमोक्रेटिक खाते में जीत जोड़ने में सफल रहे। अलबामा की दूसरी सीट से शोमारी फिगर्स की जीत भी चर्चा में रही।

गवर्नर चुनाव में चार राज्यों में सत्ता परिवर्तन

मध्यावधि चुनाव के दौरान 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदान हुआ। जॉर्जिया, आयोवा, ओहायो और टेक्सास में रिपब्लिकन के कब्जे वाली गवर्नर सीटें डेमोक्रेट्स ने छीन लीं।

जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स ने रिपब्लिकन रिक जैक्सन को हराया और वह राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर होंगी। ओहायो में एमी एक्टन ने विवेक रामास्वामी को हराया। वह राज्य की पहली महिला गवर्नर होंगी और 20 साल बाद किसी डेमोक्रेट ने यहां गवर्नर पद जीता है। आयोवा में रॉब सैंड ने जैक लान को हराया, जिससे राज्य में रिपब्लिकन नियंत्रण खत्म हुआ। टेक्सास में जीना हिनोजोसा ने मौजूदा रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराकर सबसे बड़ा उलटफेर किया। वह राज्य की पहली लैटिना गवर्नर होंगी और 1990 के दशक के बाद पहली बार कोई डेमोक्रेट वहां गवर्नर बनने जा रहा है। कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया, मैरीलैंड और इलिनॉय में डेमोक्रेट्स ने अपनी सत्ता बरकरार रखी।

भारतीय मूल के उम्मीदवारों में किसने मारी बाजी

इंडो-अमेरिकन न्यूज सर्विस के आंकड़ों का हवाला देने वाली रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 57 भारतीय मूल के उम्मीदवार अलग-अलग पदों के लिए मैदान में थे।

फ्लोरिडा की 22वीं सीट से डेमोक्रेट पिया दांडिया ने रिपब्लिकन केसी अस्कर को हराया। वह स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल रही हैं। वर्जीनिया की 10वीं सीट से सुहास सुब्रमण्यम ने डेव बेकविथ को हराकर दोबारा जीत दर्ज की। मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने गवर्नर वेस मूर के साथ दोबारा जीत हासिल की। कैलिफोर्निया की 17वीं सीट से रो खन्ना की जीत की पुष्टि हुई, जबकि अमी बेरा आठवीं बार मैदान में थे और शुरुआती मतगणना में आगे चल रहे थे। वाशिंगटन की सातवीं सीट से प्रमिला जयपाल की जीत का भी उल्लेख किया गया है।

दूसरी तरफ ट्रंप के करीबी विवेक रामास्वामी ओहायो में एमी एक्टन से हार गए, जो भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेताओं के लिए सबसे चर्चित हारों में रही। न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद पर रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी को मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने हराया और उन्होंने हार स्वीकार कर ली। मैसाचुसेट्स में निर्दलीय उम्मीदवार शिवा अय्यादुरई भी हार गए और सीनेटर एड मार्की अपनी सीट बचाने में सफल रहे।

मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराकर सीनेट सीट जीती। पूर्व जन स्वास्थ्य अधिकारी अल-सैयद डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षण ले चुके हैं और अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। उन्होंने सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा और सरकारी जवाबदेही के एजेंडे पर प्रचार किया था।

ईरान युद्ध, महंगाई और पेट्रोल की कीमतों से नाराज थे मतदाता

रिपब्लिकन हार के पीछे सबसे बड़ी वजहों में ईरान युद्ध और उससे पैदा हुई आर्थिक परेशानियों को गिना जा रहा है। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, ईंधन की बढ़ती कीमतें और रोजमर्रा की जरूरतों का महंगा होना मतदाताओं की नाराजगी का बड़ा कारण बना।

रॉयटर्स के मुताबिक एग्जिट पोल में करीब 10 में से 9 मतदाताओं ने जीवनयापन की बढ़ती लागत को वोट के लिए अहम मुद्दा बताया। करीब दो-तिहाई मतदाताओं ने महंगाई के लिए ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया। रॉयटर्स-इप्सोस के चुनाव पूर्व सर्वे में 55 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि ईरान युद्ध की कीमत अमेरिका के लिए उचित नहीं है, जबकि केवल 25 प्रतिशत ने सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया।

टैरिफ पर प्रशासन का तर्क था कि इससे अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा, लेकिन आलोचकों का कहना था कि आयात शुल्क का बोझ अंतत: उपभोक्ताओं पर पड़ता है। करीब तीन-चौथाई मतदाताओं ने देश की मौजूदा दिशा पर असंतोष जताया और करीब सात में से दस ने कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रपति की शक्तियों पर ज्यादा निगरानी रखनी चाहिए।

ट्रंप की स्वीकृति दर 38 प्रतिशत

सीबीएस न्यूज के एग्जिट पोल के शुरुआती आंकड़ों में ट्रंप की स्वीकृति दर 38 प्रतिशत रही, जो उनके पहले कार्यकाल के मध्यावधि चुनाव के समय से भी कम है। करीब छह में से दस मतदाताओं ने कहा कि हाउस के लिए वोट देते समय ट्रंप उनके फैसले का एक कारक थे। चुनाव से पहले ट्रंप ने कई रैलियां कीं और समर्थकों से ऐसे वोट करने को कहा जैसे वह खुद चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन कई राज्यों में यह प्रचार भी जीत नहीं दिला सका। युवा और लैटिन अमेरिकी मूल के मतदाताओं में भी रिपब्लिकन समर्थन में गिरावट की खबरें आईं।

कमजोर उम्मीदवार, गलत रणनीति और अतिआत्मविश्वास

टेक्सास में पैक्सटन की उम्मीदवारी पर पार्टी के भीतर सवाल उठे थे, फिर भी ट्रंप ने उनका समर्थन किया। दक्षिण कैरोलिना में ट्रंप समर्थन के बावजूद डार्लिन ग्राहम हारीं और मेन में अनुभवी सुसान कॉलिन्स भी नहीं बच सकीं। ओहायो में रामास्वामी की हार ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या रिपब्लिकन ने स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता से ज्यादा राष्ट्रपति के समर्थन को महत्व दिया। रिपब्लिकन ने कई राज्यों में चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं बदलकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की थी, जिसका जवाब डेमोक्रेट्स ने कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में दिया। इसके बावजूद डेमोक्रेट्स ने कई चुनौतीपूर्ण सीटें जीत लीं।

अब आगे क्या: पाठकों के लिए जरूरी जानकारी

अमेरिका में हाउस के पास सरकारी खर्च और बजट से जुड़े विधेयकों की अहम भूमिका होती है, जबकि सीनेट राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त जजों, मंत्रियों और राजदूतों की पुष्टि करती है। दोनों सदनों में विपक्ष का नियंत्रण होने से ट्रंप के लिए नए कानून और नियुक्तियां आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है। संसदीय समितियों के जरिए सरकार के फैसलों की जांच और सुनवाई भी बढ़ सकती है।

भारत के नजरिए से देखें तो व्यापार, टैरिफ और वीजा जैसे मुद्दों पर अमेरिकी संसद का रुख अहम रहेगा। हालांकि टैरिफ जैसे कई फैसले कार्यकारी आदेशों से भी लिए जाते हैं, इसलिए कांग्रेस में बदले समीकरण का वास्तविक असर आने वाले महीनों में सामने आएगा। मध्यावधि नतीजे आमतौर पर राष्ट्रपति के कार्यकाल के लिए जनमत संग्रह की तरह देखे जाते हैं और इन्हें 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले का बड़ा राजनीतिक संकेत माना जाता है। कुछ सीटों पर गिनती जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ों के लिए आधिकारिक नतीजों का इंतजार करें।