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एआई तकनीक से हिमाचल की बागवानी को नई रफ्तार, फलों की ग्रेडिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल

➤ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी फलों की सटीक और वैज्ञानिक ग्रेडिंग
➤ साइज, रंग और डैमेज के आधार पर होगी बेहतर छंटाई
➤ बागवानों को मिलेगा उचित दाम, स्किल्ड लेबर पर निर्भरता घटेगी


सेब राज्य हिमाचल प्रदेश में बागवानी अब आधुनिक तकनीक के सहारे और उन्नत हो रही है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फलों की ग्रेडिंग की जा रही है, जिससे बेहतर गुणवत्ता और समान पैकिंग के फल सीधे बाजार तक पहुंच सकेंगे।

एआई आधारित ग्रेडिंग मशीन बनाने वाली कंपनी मार्श हेरीयर के सह-संस्थापक नितिन गुप्ता ने शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि फलों की ग्रेडिंग बागवानी की सबसे अहम प्रक्रिया है। अब एआई तकनीक के जरिए यह काम तेजी और सटीकता के साथ किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक फलों की छंटाई मैकेनिकल मशीनों से की जाती थी, जिसमें केवल साइज और कुछ हद तक रंग को ही आधार बनाया जाता था। लेकिन एआई तकनीक से अब फलों को साइज, रंग, डैमेज और गुणवत्ता के आधार पर पूरी तरह ग्रेड किया जा सकता है।

बेहतर ग्रेडिंग से पैकिंग के दौरान केवल एक समान और उच्च गुणवत्ता वाले फल ही बाजार में पहुंचेंगे, जिससे बागवानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

नितिन गुप्ता ने बताया कि बीते सीजन में प्रदेश के कई बागवानों ने इस तकनीक को अपनाया, जिससे उन्हें सटीक ग्रेडिंग, समय की बचत और स्किल्ड लेबर की कमी से राहत मिली। एआई मशीनें स्किल्ड वर्कर्स से भी अधिक सटीकता के साथ फलों की ग्रेडिंग कर सकती हैं।

उन्होंने बताया कि यह मशीन सेब के अलावा अन्य स्टोन फ्रूट्स और कई फलों की ग्रेडिंग के लिए भी उपयोगी है, जिससे भविष्य में हिमाचल की बागवानी को तकनीकी मजबूती मिलेगी।