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HMOA कांगड़ा ने गोवा डॉक्टरों के समर्थन में उठाई आवाज, VIP कल्‍चर और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध की मांग

  • हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) कांगड़ा ने गोवा रेजिडेंट डॉक्टर्स संघ (GARD) के समर्थन में जताई एकजुटता

  • गोवा के स्वास्थ्य मंत्री के आचरण पर कड़ी आपत्ति, सार्वजनिक माफी की मांग

  • VIP संस्कृति के खिलाफ सख्त रुख, आपात विभाग में निष्पक्ष चिकित्सा की नीति की मांग


धर्मशाला, शिवांशु शुक्‍ला:  हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) की जिला कांगड़ा इकाई ने गोवा में एक चिकित्सक के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ ने गोवा एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (GARD) के साथ एकजुटता दिखाते हुए गोवा के स्वास्थ्य मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि चिकित्सा पेशे की गरिमा और डॉक्टरों की सुरक्षा पर कोई आंच आएगी, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

HMOA कांगड़ा ने एक प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि डॉक्टरों की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करना अब समय की मांग है। वक्तव्य में पांच प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखी गई हैं, जिनमें सबसे प्रमुख मांग है – गोवा के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगना, जो एक अधिकारी के साथ उनके कथित अमर्यादित व्यवहार से जुड़ी है।

इसके अलावा HMOA ने रोगी देखभाल क्षेत्रों विशेषकर आपातकालीन विभाग (Casualty) में किसी भी प्रकार की वीडियोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध, VIP संस्कृति के पूरी तरह खात्मे और मरीजों को इलाज में सिर्फ क्लिनिकल प्राथमिकता (Triage) के आधार पर प्राथमिकता देने की मांग की है।

यह हैं मांगें


  1. संबंधित घटना की निष्पक्ष जांच हो।

  2. गोवा के स्वास्थ्य मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

  3. भविष्य में किसी भी डॉक्टर के साथ ऐसा व्यवहार न दोहराया जाए – इसकी सरकारी गारंटी हो।

  4. रोगी देखभाल क्षेत्रों में मीडिया या किसी अन्य माध्यम से वीडियोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।

  5. VIP संस्कृति खत्म की जाए और Casualty जैसे विभागों में इलाज की प्राथमिकता सामाजिक/राजनीतिक हैसियत के बजाय मेडिकल स्थिति के अनुसार तय हो।

“हम मरीजों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन पेशे की गरिमा के साथ समझौता नहीं कर सकते,” HMOA के वक्तव्य में कहा गया। इस मौके पर जिला कांगड़ा HMOA के पदाधिकारी डॉ. मितुल राणा (CH चडियार), डॉ. सचिन शर्मा (जिला कार्यकारिणी सदस्य), डॉ. केशव कौंडल (RPGMC टांडा), डॉ. उदय सिंह (अध्यक्ष) और महासचिव डॉ. सचिन शर्मा ने हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए नहीं बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय की आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और सम्मान के लिए है।

संगठन ने सरकार से इस मामले में त्वरित और संवेदनशील हस्तक्षेप की मांग की है ताकि डॉक्टरों के मन में असुरक्षा की भावना समाप्त हो और चिकित्सा पेशे में समाज का भरोसा बना रहे। डॉक्टरों ने दोहराया – ‘हम मरीजों की सेवा में समर्पित हैं, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं।’