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कैरी बैग के छह रुपए लेना पड़ा महंगा, शोरूम संचालक को अब देने होंगे आठ हजार

➤ उपभोक्ता आयोग ने कैरी बैग शुल्क वसूली को अनुचित व्यापार व्यवहार माना
➤ शो रूम मालिक को 6 रुपये लौटाने, 5,000 रुपये हर्जाना और 3,000 रुपये खर्च देने का आदेश
➤ बड़े शोरूम द्वारा ग्राहकों से बैग शुल्क लेने की प्रथा पर सख्ती



उपभोक्ता आयोग ने ग्राहकों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दुकानदार ग्राहकों से कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क नहीं वसूल सकते। यह मामला प्रीति सूद की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने लोअर बाजार स्थित बाटा शूज स्टोर से दो जोड़ी चप्पलें खरीदीं। बिल की राशि 505 रुपये बनी, जबकि एमआरपी के अनुसार 499 रुपये होनी चाहिए थी। जब महिला ने आपत्ति जताई तो बताया गया कि 6 रुपये पेपर कैरी बैग के लिए वसूले गए हैं।

शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि कैरी बैग पर बाटा इंडिया लिमिटेड की ब्रांडिंग थी, जबकि असली निर्माता कोई और कंपनी थी। इसका अर्थ है कि ग्राहक से न केवल बैग के पैसे वसूले गए बल्कि इसे ब्रांड प्रचार के साधन के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। यह प्रथा उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने 4 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश में कहा कि कैरी बैग सामान की बिक्री का अभिन्न हिस्सा है और इसके लिए अलग से पैसे वसूलने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार दुकानदारों को नहीं है। आयोग ने शो रूम मालिक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 6 रुपये वापस करने, मानसिक उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 3,000 रुपये 45 दिन के भीतर अदा करे।

शहर में देखा गया है कि कई बड़े शोरूम और ब्रांडेड स्टोर खरीदारी के बाद ग्राहकों से कैरी बैग के नाम पर पैसे वसूलते हैं। यहां तक कि हजारों रुपये की खरीदारी के बावजूद ग्राहकों को बैग मुफ्त नहीं दिया जाता। इसके विपरीत, रेहड़ी-पटरी वाले या छोटे दुकानदार ग्राहकों को बैग या अखबार में लपेटकर सामान देते हैं। आयोग ने माना कि यह ग्राहकों पर अनुचित बोझ डालने जैसा है और सेवा में कमी मानी जाएगी।

यह फैसला न केवल शिकायतकर्ता के लिए राहत लेकर आया है बल्कि इससे भविष्य में दुकानदारों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी।