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चेस्टर हिल मामले में बड़ा खुलासा, प्रारंभिक जांच में 150 बीघा जमीन में अनियमिताएं उजागर, राजस्व मंत्री बोले जांच जारी, तथ्यों को लाया जाएगा सामने

चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में 150 बीघा जमीन में बड़ी अनियमितताएं उजागर
धारा 118 उल्लंघन और बेनामी खरीद के संकेत, जांच जारी
रेरा का 70 लाख जुर्माना, मंत्री ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए



शिमला/सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित बहुचर्चित चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट में बड़े जमीन घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में करीब 150 बीघा जमीन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रदेश के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है और जांच के बाद सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा।

जांच रिपोर्ट के अनुसार चेस्टर हिल्स-2 और चेस्टर हिल्स-4 प्रोजेक्ट्स में हिमाचल की भूमि खरीद से जुड़ी धारा 118 का उल्लंघन किया गया है। आरोप है कि एक स्थानीय कृषक हंस राज ठाकुर के नाम पर करीब 275 बीघा जमीन खरीदी गई, जो उनकी आय के अनुरूप नहीं है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस जमीन पर वास्तविक नियंत्रण गैर-कृषक प्रमोटर्स का है, जिससे यह मामला बेनामी जमीन खरीद की श्रेणी में आता दिख रहा है।

मामले में एक और बड़ा पहलू सामने आया है कि हिमाचल रेरा ने चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट्स पर 35-35 लाख रुपये का अंतरिम जुर्माना लगाया है। आरोप हैं कि प्रोजेक्ट में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिना कब्जा दिया गया, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के गठन में अनियमितता बरती गई और प्रोजेक्ट फंड के उपयोग में भी गड़बड़ी की गई।

मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और विभागीय स्तर पर जांच जारी है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी मंत्री नेगी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने इसे “शक्ति वंदना बिल” बताते हुए आरोप लगाया कि इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब बिल पहले ही 2023 में पास हो चुका था, तो दोबारा विशेष सत्र बुलाकर इसे पेश करने का क्या औचित्य है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के देर रात संबोधन को लेकर भी सवाल उठाए और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की।

इसके अलावा सांसद कंगना रनौत के बयानों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए नेगी ने कहा कि महिला अधिकारों की बात करने वालों को मणिपुर जैसी घटनाओं पर भी स्पष्ट रुख दिखाना चाहिए।

वहीं प्रदेश में विकास कार्यों को जारी रखने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायकों और अधिकारियों के वेतन का हिस्सा छह महीने के लिए डिफर करने के फैसले का भी उन्होंने बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह कदम विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया गया है।

सरकार ने साफ किया है कि जांच पूरी होने के बाद जवाबदेही तय कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजरें इस मामले की अगली रिपोर्ट और संभावित खुलासों पर टिकी हैं।