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चुराह के तीन सरकारी स्कूलों में अगले सत्र से सीबीएसई पैटर्न, कक्षाएं शुरू होने से पहले होगी शिक्षकों की नियुक्ति

➤ चुराह की 15 हजार महिलाओं को सरकार के चार साल पूरे होने के बाद मिलेंगे 1500 रुपये प्रतिमाह

➤ 60.67 करोड़ रुपये की नौ परियोजनाओं के उद्घाटन-शिलान्यास प्रस्तावित, राजस्थान को बिजली बेचने से 400 करोड़ आमदनी का दावा


चंबा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को चंबा जिले के चुराह विधानसभा क्षेत्र के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने जनसभा के दौरान क्षेत्र की 15 हजार महिलाओं को सरकार के चार वर्ष पूरे होने के बाद प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया। इसके साथ ही हिमगिरि, थल्ली और झज्जाकोठी के तीन सरकारी स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पैटर्न लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग की नौ विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास प्रस्तावित हैं, जिन पर कुल 60.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने चुराह विधानसभा क्षेत्र में चार सीबीएसई स्कूल खोलने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री के अनुसार चुराह के कांग्रेस नेताओं के आग्रह पर तीन सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने का निर्णय लिया गया है। सीबीएसई की कक्षाएं शुरू होने से पहले इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। तीसा स्कूल को सीबीएसई से जोड़ने का फैसला भी प्रदेश सरकार ले चुकी है।

क्षेत्र के अन्य तीन स्कूलों को भी सीबीएसई से जोड़ने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। यह फैसला विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर होगा। जिन स्कूलों में 300 से 400 विद्यार्थी होंगे, उन्हें भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकता है। संबंधित स्कूलों का रिकॉर्ड मंगवाया गया है।

सभा में मुख्यमंत्री ने चुराह के भाजपा विधायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह 15 साल तक क्षेत्र के विधायक रहे, लेकिन तब शिक्षा नीति पर सवाल क्यों नहीं उठाए। उन्होंने पूछा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तीसा स्कूल को सीबीएसई से जोड़ने का फैसला सरकार ने लिया, लेकिन स्थानीय भाजपा विधायक ने इसके लिए आभार तक व्यक्त नहीं किया।

प्रशासनिक सुधारों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। तहसीलों में इंतकाल की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है और अन्य जरूरी सेवाएं भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए तहसीलों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और घर बैठे सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

राजस्थान को बिजली बेचने का दावा: मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कई फैसले लिए हैं। उनके अनुसार राजस्थान को 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने का समझौता हुआ है, जिससे आगामी चार महीनों में प्रदेश को करीब 400 करोड़ रुपये की आमदनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद कर हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही है।

बुधवार को भंजराड़ू में मुख्यमंत्री ने कहा कि बैरास्यूल जलविद्युत परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश की निशुल्क बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पैरवी की गई है।

पाठकों के लिए जरूरी जानकारी: प्रदेश में महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के तहत दी जा रही है, जिसे सरकार बजट की उपलब्धता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है। चुराह की इस घोषणा के लिए पात्रता की शर्तें, आवेदन की प्रक्रिया और राशि कब से मिलेगी, इसका ब्योरा संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना आने पर ही स्पष्ट होगा। इसलिए पात्र महिलाएं अफवाहों और बिचौलियों के झांसे में न आएं और जानकारी केवल पंचायत, खंड विकास कार्यालय या संबंधित विभाग से ही लें। किसी को भी योजना के नाम पर पैसे देने या निजी जानकारी और बैंक विवरण साझा करने की जरूरत नहीं है।

सीबीएसई से संबद्धता के बाद अभिभावकों और विद्यार्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न में बदलाव होता है। स्कूल कब से सीबीएसई के तहत पढ़ाई शुरू करेंगे, कौन सी कक्षाओं से यह लागू होगा और शिक्षकों की तैनाती कैसे होगी, इसकी जानकारी शिक्षा विभाग की सूचना से ही लें। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा के अवसर बच्चों को शहरों की ओर पलायन से रोकने में भी मददगार हो सकते हैं, बशर्ते स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, भवन और संसाधन समय पर उपलब्ध कराए जाएं।