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धर्म व्यक्तिगत आस्था, राज्य का दृष्टिकोण धर्मनिरपेक्ष: सुक्‍खू

➤ धर्म व्यक्तिगत आस्था, राज्य का दृष्टिकोण होना चाहिए धर्मनिरपेक्ष
➤ सीएम सुक्खू ने दिल्ली सम्मेलन में रखे स्पष्ट विचार
➤ धार्मिक सहिष्णुता को बताया भारत की ताकत



नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के विधि, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को ‘धर्म और संविधान’ विषय पर बेहद महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि धर्म एक व्यक्तिगत आस्था का विषय है, जबकि राज्य का दृष्टिकोण पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए, जिसमें सभी धर्मों का सम्मान, सहिष्णुता और समरसता समान रूप से निहित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी ताकत है। हम एक ऐसे देश के नागरिक हैं जहां हर धर्म को मानने की स्वतंत्रता है और इस सहिष्णुता ने सदियों से हमारे सामाजिक ताने-बाने को मजबूत किया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि धर्म का प्रयोग जोड़ने के लिए होना चाहिए, तोड़ने के लिए नहीं

सुक्खू ने यह भी कहा कि राजनीति और धर्म के बीच स्पष्ट रेखा खिंचनी चाहिए, ताकि लोकतंत्र के स्तंभ सुरक्षित रहें और समाज में किसी भी तरह का ध्रुवीकरण या वैमनस्य न पनप सके। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे ‘सर्व धर्म समभाव’ के सिद्धांत पर चलते हुए भाईचारे की भावना को पोषित करें

मुख्यमंत्री के साथ इस सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, अलका लांबा, प्रमोद तिवारी समेत अन्य कांग्रेस नेता भी मौजूद रहे और उन्होंने भी संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सुझाव दिए।