➤ धर्मशाला में दलाई लामा ने हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे को पहनाई किन्नौरी टोपी
➤ तिब्बत के समर्थन में लंबे योगदान के लिए जताया आभार, पुराना और भरोसेमंद मित्र बताया
➤ माथे से माथा मिलाकर किया अभिवादन, करुणा और विश्व शांति के संदेश की सराहना
धर्मशाला। हिमाचल के मैक्लोडगंज में रविवार को दलाई लामा ने अपने आधिकारिक निवास पर हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने गेरे को हिमाचल की पारंपरिक किन्नौरी टोपी पहनाकर सम्मानित किया और तिब्बत के समर्थन में उनके लंबे योगदान के लिए आभार जताया। दलाई लामा ने उन्हें अपना पुराना और भरोसेमंद मित्र बताया।
मुलाकात के दौरान दोनों ने हाथ थामकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। तिब्बती परंपरा के अनुसार माथे से माथा मिलाकर स्नेह भी जताया गया। गेरे ने दलाई लामा के प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनका आशीर्वाद लिया।
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि करुणा, आपसी भाईचारे और विश्व शांति का संदेश फैलाने में रिचर्ड गेरे का योगदान सराहनीय है। उन्होंने तिब्बती संस्कृति और मानवाधिकारों के समर्थन में गेरे के दशकों लंबे समर्पण की प्रशंसा की।
रिचर्ड गेरे 1980 के दशक से दलाई लामा के अनुयायी और तिब्बती मुद्दे के मुखर समर्थक रहे हैं। वह इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (आईसीटी) के अध्यक्ष भी हैं। इस संगठन के माध्यम से वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिब्बत की सांस्कृतिक पहचान, मानवाधिकारों और अहिंसा का मुद्दा उठाते रहे हैं।
दलाई लामा और गेरे की दोस्ती चार दशक से भी अधिक पुरानी है। गेरे लंबे समय से तिब्बती समुदाय के अधिकारों और उसकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सक्रिय हैं। दोनों की यह मुलाकात पुराने संबंधों और साझा प्रतिबद्धताओं की एक और झलक रही।
धर्मशाला और मैक्लोडगंज आने वाले पर्यटकों के लिए जरूरी जानकारी
मैक्लोडगंज को “छोटा ल्हासा” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय रहता है और यह निर्वासित तिब्बती प्रशासन का केंद्र है। यहां का त्सुगलागखांग परिसर, तिब्बती संग्रहालय और बाजार देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। पर्यटकों को चाहिए कि वे धार्मिक स्थलों पर शांति और मर्यादा बनाए रखें, फोटो खींचने से पहले अनुमति लें और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें।
किन्नौरी टोपी हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है। यह किन्नौर और आसपास के क्षेत्रों की पारंपरिक पोशाक का हिस्सा है, जिसकी पट्टी का रंग अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान बताता है। नवंबर में धर्मशाला और मैक्लोडगंज में सुबह-शाम ठंड बढ़ जाती है, इसलिए पर्यटक गर्म कपड़े साथ रखें और पहाड़ी सड़कों पर सावधानी से वाहन चलाएं।



