➤ धर्मशाला में 16 से 21 नवंबर तक होने वाले शीतकालीन सत्र से पहले विधानसभा भवन होगा अत्याधुनिक
➤ 2006 में बने भवन के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण पर 3 करोड़ 70 लाख रुपये खर्च
➤ मंत्री खंड के पटल, अग्निशमन प्रणाली और ऑडियो-विजुअल प्रणाली होगी अपग्रेड
धर्मशाला। तपोवन स्थित विधानसभा परिसर में इस बार शीतकालीन सत्र नए और अत्याधुनिक स्वरूप में नजर आएगा। 16 से 21 नवंबर तक आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र से पहले धर्मशाला स्थित विधानसभा भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
वर्ष 2006 में निर्मित इस ऐतिहासिक भवन के आधुनिकीकरण, मरम्मत और नवीनीकरण पर कुल 3 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि खर्च की जा रही है। भवन की पुरानी व्यवस्थाओं को बदलकर उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके तहत मंत्री खंड के पटल, अग्निशमन प्रणाली और सदन की ऑडियो-विजुअल प्रणाली को अपग्रेड किया जा रहा है। इन तकनीकी कार्यों के लिए 3 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है। लोक निर्माण विभाग का विद्युत प्रभाग इन सभी कार्यों को तेजी से पूरा करने में जुटा है।
निर्माण के बाद से ही सदन में कई पुरानी प्रणालियां उपयोग में लाई जा रही थीं, जिन्हें आधुनिक जरूरतों के अनुसार बदलना आवश्यक हो गया था। तकनीकी बदलावों को देखते हुए सदन की ध्वनि व्यवस्था को उच्च तकनीक आधारित बनाया जा रहा है, ताकि कार्यवाही के दौरान स्पष्ट संवाद सुनिश्चित हो सके।
धर्मशाला और कांगड़ा के लोगों के लिए जरूरी जानकारी
हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त है और हर साल यहां तपोवन में विधानसभा का शीतकालीन सत्र आयोजित होता है। सत्र के दौरान मंत्री, विधायक, अधिकारी और मीडियाकर्मियों की आवाजाही बढ़ जाती है, जिससे विधानसभा परिसर के आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव रह सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सत्र की अवधि में वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और प्रशासन की ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी जाती है।
सदन की कार्यवाही आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक ऑडियो-विजुअल और ध्वनि प्रणाली से कार्यवाही का प्रसारण और रिकॉर्डिंग बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे जनता को अपने जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। अग्निशमन प्रणाली के उन्नयन से भवन की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी, जो सार्वजनिक भवनों में आपात स्थिति से निपटने के लिए बेहद जरूरी है।



