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फर्जी एंटी टेररिस्ट अधिकारी बन ठगों ने बुजुर्ग दंपती को लगाया चूना

फर्जी एंटी टेररिस्ट सेल अधिकारी बन ठगों ने बुजुर्ग दंपती को डराया
दस्तावेज सत्यापन के नाम पर 80 हजार ट्रांसफर, 6 लाख की एफडी तुड़वाने का दबाव
बैंक प्रबंधक की सतर्कता से बची जीवनभर की जमा पूंजी


हिमाचल में साइबर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शातिर अपराधियों ने खुद को एंटी टेररिस्ट सेल का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग दंपती को डराया-धमकाया और उनसे बड़ी रकम ऐंठने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक 19 फरवरी को ठगों ने दंपती को कॉल कर कहा कि उनके बैंक खाते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में हो रहा है।

जब दंपती ने इस दावे पर संदेह जताया तो ठगों ने वीडियो कॉल कर फर्जी दस्तावेज दिखाए और खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। दस्तावेज सत्यापन के नाम पर दंपती से ऑनलाइन 80 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। इतना ही नहीं, ठगों ने उन्हें अगले दिन बैंक जाकर छह लाख रुपये की एफडी तुड़वाने के लिए दबाव डाला और सख्त हिदायत दी कि वे घर से बाहर न निकलें।

20 फरवरी को दंपती जब ICICI Bank की भोटा चौक शाखा पहुंचे और एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की, तो शाखा प्रबंधक मनीष मनु को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने बुजुर्ग को अपने केबिन में बुलाकर पूरी जानकारी ली। बातचीत के दौरान दंपती ने वीडियो कॉल, धमकियों और पैसे ट्रांसफर की पूरी कहानी बताई। बैंक प्रबंधक ने तुरंत ठगों से फोन पर बात की, जिससे पूरा मामला उजागर हो गया।

बैंक प्रबंधन ने तत्परता दिखाते हुए परिवार को सूचित किया। इसके बाद परिजनों ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। एहतियातन बुजुर्ग का नया खाता खोलकर उनकी शेष जमा पूंजी सुरक्षित कर ली गई। बैंक प्रबंधक ने लोगों को आगाह किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और फोन पर बैंक खातों से जुड़ी जानकारी साझा करना बेहद खतरनाक है।

मामले को लेकर बलवीर ठाकुर ने स्पष्ट किया कि पुलिस कभी किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। नागरिक संदिग्ध कॉल्स पर कोई भी बैंक या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और तुरंत पुलिस या बैंक शाखा से संपर्क करें।

गौरतलब है कि जनवरी में भी साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को हनीट्रैप में फंसाकर 16,53,500 रुपये की ठगी की थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश से एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। पिछले वर्ष हमीरपुर निवासी एक रिटायर्ड अधिकारी से 82 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया था। लगातार बढ़ते ऐसे मामलों ने प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।