➤ आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर ऊना में बीजेपी की संगोष्ठी
➤ राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने बताया आपातकाल को लोकतंत्र पर हमला
➤ कार्यक्रम में विपक्ष, मीडिया और जनता के दमन की चर्चा हुई
ज्योति स्याल, ऊना
Emergency 1975: ऊना जिले के दीपकमल बीजेपी कार्यालय में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और कार्यकर्ताओं को आपातकाल के दौर की भीषण वास्तविकता से अवगत कराया।
डॉ. सिकंदर कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान आपातकाल लागू करने की इजाज़त केवल तीन परिस्थितियों में देता है – बाहरी आक्रमण, आंतरिक विद्रोह, और गंभीर आर्थिक संकट। उन्होंने बताया कि इससे पहले दो बार देश में आपातकाल 1962 में चीन युद्ध और 1971 में पाकिस्तान युद्ध के दौरान लगाया गया था, लेकिन 1975 का आपातकाल पूरी तरह राजनीतिक था।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए राष्ट्रपति पर दबाव डालकर आपातकाल लागू करवाया। यह एक ऐसा दौर था जब देश में भय, दमन और अंधकार का साम्राज्य छा गया था। मीडिया पर सेंसरशिप, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां, छात्र संगठनों का दमन, और आम नागरिकों की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक – ये सब उस समय की पहचान बन गए थे।
सांसद ने कहा, “वह पीड़ा वही लोग समझ सकते हैं जिन्होंने 21 महीने तक वह अन्याय सहा। आज जब हम खुलकर बोल सकते हैं, लिख सकते हैं और आलोचना कर सकते हैं – तब हमें लोकतंत्र के महत्व को और भी गहराई से समझना चाहिए।”
संगोष्ठी में जिला बीजेपी अध्यक्ष शाम मिन्हास, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, पूर्व विधायक दविंद्र भुट्टो, बलवीर चौधरी, विश्वजीत सिंह पटियाला, सुशील कालिया, ओंकार कसाना, बलवीर बग्गा, संतोष सैनी, अतुल शर्मा, विनय शर्मा, जनक राज खजांची, बलराम बबलू, मनोहर लाल शर्मा सहित सैकड़ों बीजेपी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि देशभर में इस दिन संगोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं ताकि नई पीढ़ी लोकतंत्र की रक्षा का महत्व समझ सके और इतिहास से सबक ले।



