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किसानों को ‘अन्नदाता’ नहीं ‘भाग्यविधाता’ मानें; PM किसान निधि में वृद्धि जरूरी – उपराष्ट्रपति धनखड़

  • उपराष्ट्रपति ने सोलन के डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय में छात्रों को किया संबोधित
  • किसानों को बताया ‘भाग्यविधाता’, कृषि को बनाया आत्मनिर्भर भारत का आधार
  • PM किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने और सब्सिडी सीधे किसानों को देने की वकालत
  • ‘एक्सपोर्ट मानसिकता’ पर जताई चिंता: “सबसे अच्छा तो हमको खाना चाहिए”


सोलन, शिवानी ठाकुर: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज सोलन स्थित डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, भाग्यविधाता हैं।” उन्होंने Agriculture Intelligence से Artificial Intelligence तक की यात्रा को इस पीढ़ी का सौभाग्य बताया और कहा कि यही परिवर्तन देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांति ला सकता है।

धनखड़ ने स्पष्ट कहा कि “विकसित भारत का रास्ता किसान के खेत से होकर जाएगा।” उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर तभी बनाया जा सकता है जब कृषि को केंद्र में रखकर योजनाएं बनें और किसानों को सशक्त किया जाए।

एक्सपोर्ट केंद्रित मानसिकता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “जब लोग कहते हैं यह एक्सपोर्ट माल है, तो मुझे तकलीफ होती है। क्यों? सबसे अच्छा खाना-पहनना तो हमें ही चाहिए।” यह बयान न केवल स्वदेशी सोच को बल देता है, बल्कि भारत के कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी नई सोच की मांग करता है।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का जिक्र करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से आग्रह किया कि इस योजना में दी जा रही 6000 रुपये की राशि में मुद्रास्फीति के अनुसार बढ़ोतरी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कृषि से जुड़ी सभी सब्सिडी सीधे किसानों को दी जाए, तो एक किसान परिवार को सालाना लगभग 30,000 रुपये की सीधी मदद मिल सकती है।

धनखड़ ने सुझाव दिया कि फर्टिलाइज़र सब्सिडी भी सीधे किसानों को मिले, ताकि वे खुद यह तय कर सकें कि जैविक खेती या प्राकृतिक खेती के विकल्प चुनें। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां किसानों की आय औसत परिवारों से अधिक है क्योंकि सरकारी सहायता सीधे किसानों तक पहुंचती है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं को कृषि उद्यमी बनाने की आवश्यकता है और इसके लिए संस्थानों को प्रशिक्षण केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “गांवों में सब्जियां शहरों से क्यों आती हैं?” और टमाटर जैसी फसलों के सड़कों पर फेंके जाने की घटनाओं को शर्मनाक बताया। उन्होंने खेत स्तर पर मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण की सशक्त व्यवस्था खड़ी करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में सांसद सुरेश कश्यप, हिमाचल प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल, और कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।


उप-राष्ट्रपति बोले-ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने अलग पहचान बनाई:यह पहला अवसर, जब कोई सबूत भी नहीं मांग रहा, सोलन में पूर्व CJI से मुलाकात

 

भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शनिवार को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला स्थित डॉक्टर वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी पहुंचे। यहां पर उन्होंने एक संवाद कार्यक्रम में स्टूडेंट, रिसर्चर और फैकल्टी मेंबर से विकसित भारत, युवा कृषि वैज्ञानिक दृष्टिकोण व संकल्प विषय पर संवाद किया।

इस दौरान उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने देश को अलग पहचान दी है। यह पहला अवसर है जब कोई इसके सबूत नहीं मांग रहा। उन्होंने कहा कि, हिमाचल भी वीर भूमि है। दुश्मन पाकिस्तान को लोहे के चने चबाने में हिमाचल के वीर सपूतों का भी बड़ा योगदान है।

इससे पहले नौणी विवि के कुलपति डॉ.राजेश्वर सिंह चंदेल ने विवि की उपलब्धियां गिनाईं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल ने उनका स्वागत किया। शिमला से सांसद सुरेश कश्यप भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर उप राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए
पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर उप राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए

पूर्व सीजेआई से मिलने गए उप राष्ट्रपति

नौणी यूनिवर्सिटी में संवाद कार्यक्रम के बाद जगदीप धनकड़ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एवं पुराने मित्र टीएस ठाकुर के घर पहुंचे। एक घंटे की मुलाकात के बाद वह हेलिकॉप्टर से चंडीगढ़ चले गए, वहां से बेंगलुरु जाएंगे।

बता दें कि, जगदीप धनखड़ दो दिन के हिमाचल दौरे पर आए थे। शुक्रवार की सुबह वह चंडीगढ़ से शिमला पहुंचे और रात में राजभवन में ठहरे। यहां पर रात्रि भोज का आयोजन किया गया। इसमें राज्यपाल के अलावा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, सभी कैबिनेट मंत्री इत्यादि मौजूद रहे।

आमतौर पर राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति शिमला के छराबड़ा स्थिति राष्ट्रपति निवास रिट्रीट ठहरते हैं। मगर जगदीप धनखड़ रिट्रीट नहीं गए।