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हिमाचल में नशे का बढ़ता खतरा: 3 साल में ओवरडोज से 66 मौतें, विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े


2023 से जनवरी 2026 तक ओवरडोज से 66 मौतें, 2024 में सबसे ज्यादा 31 मौतें
प्रदेश में नशे से जुड़े 6,246 मामले दर्ज, 5,437 केस अभी भी लंबित
भाजपा विधायक Jit Ram Katwal और Prakash Rana के सवाल पर सरकार ने दिए आंकड़े


हिमाचल प्रदेश में नशे का बढ़ता जाल अब एक गंभीर सामाजिक और कानून व्यवस्था की चुनौती बनकर उभर रहा है। विधानसभा में मंगलवार को भाजपा विधायक Jit Ram Katwal और Prakash Rana के सवाल पर सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब ने स्थिति की भयावह तस्वीर सामने रख दी है।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश में नशे की ओवरडोज के कारण कुल 66 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में 8, 2024 में 31 और 2025 में 27 मौतें दर्ज की गईं। खास बात यह है कि 2024 में अचानक मौतों की संख्या में तेज उछाल आया, जो नशे के तेजी से फैलते जाल की ओर संकेत करता है।

हालांकि, जवाब में यह भी उल्लेख किया गया कि 1 जनवरी 2020 से 31 जनवरी 2026 तक ओवरडोज से मौत का कोई मामला सरकार के संज्ञान में नहीं आया है, जो आंकड़ों को लेकर भ्रम की स्थिति भी पैदा करता है।

प्रदेश में नशे से जुड़े मामलों की संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है। अब तक 6,246 केस दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से पुलिस ने 5,684 मामलों में चालान अदालत में पेश किया है। इसके अलावा 19 मामलों में रद्द रिपोर्ट दाखिल की गई है, 57 मामले अब तक अनट्रेस्ड हैं और 486 मामले जांच के अधीन हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और कम सजा दर है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 108 मामलों में सजा हो पाई है, जबकि 139 मामलों में आरोपित बरी हो गए हैं। वहीं, 5,437 मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं, जो कानून व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या अब केवल कानून का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ा संकट बन चुकी है। ऐसे में सख्त कानून के साथ-साथ जनजागरूकता, पुनर्वास और तेज न्यायिक प्रक्रिया की जरूरत भी उतनी ही अहम हो गई है।