➤ नन्ही नातिन को सजे-धजे रथ में बिठाकर बैंड-बाजे के साथ नाना के घर लाए परिजन
➤ सेवानिवृत्त कानूनगो शेर सिंह के परिवार ने दूसरी बार दोहराई बेटी के स्वागत की खास परंपरा
➤ नाना बोले—बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं, उनके जन्म को उत्सव की तरह मनाएं
हमीरपुर। बेटियों के जन्म पर खुशियां मनाने और समाज में उनके सम्मान का संदेश देने वाली एक खूबसूरत मिसाल हमीरपुर शहर के वार्ड नंबर 10 बाईपास में देखने को मिली। यहां सेवानिवृत्त कानूनगो शेर सिंह के परिवार ने अपनी नन्ही नातिन श्रजीनिका के पहली बार नाना के घर आगमन को यादगार बनाने के लिए खास आयोजन किया। नन्ही परी को सजे-धजे रथ में बिठाकर बैंड-बाजे की धुनों के बीच घर लाया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने उत्साह के साथ जश्न मनाया और बेटी के आगमन की खुशियां साझा कीं।
नन्ही नातिन के स्वागत के लिए नाना शेर सिंह, नानी अनीता और परिवार के अन्य सदस्य व रिश्तेदार घर से कुछ दूरी पर ही एकत्रित हो गए थे। इसके बाद बैंड-बाजे के साथ रथ यात्रा निकाली गई। सजे-धजे रथ में बैठी नन्ही श्रजीनिका के घर पहुंचने पर परिजनों ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरे परिवार में खुशी और उत्साह का माहौल रहा। इस आयोजन ने आसपास के लोगों का भी ध्यान खींचा और बेटी के जन्म को उत्सव की तरह मनाने का संदेश दिया।
तीन साल पहले भी इसी तरह मनाया था जश्न
नाना शेर सिंह ने बताया कि करीब तीन साल पहले उनकी बड़ी बेटी के घर भी बेटी का जन्म हुआ था। उस समय भी नातिन को इसी तरह भव्य रथ में बिठाकर पहली बार नाना के घर लाया गया था। परिवार ने उस समय भी बेटी के आगमन पर खुशियां मनाई थीं।
अब दूसरी नातिन के घर आने पर परिवार ने उसी परंपरा को फिर से निभाया। रथ, बैंड-बाजे और रिश्तेदारों की मौजूदगी के बीच आयोजित स्वागत समारोह ने परिवार के लिए इन पलों को खास बना दिया। दोनों अवसरों पर बेटियों के आगमन को समान उत्साह के साथ मनाने की इस पहल ने परिवार की सोच और बेटियों के प्रति स्नेह को दर्शाया।
बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं: शेर सिंह
शेर सिंह ने कहा कि बेटियों के घर में आने से खुशियां और बढ़ जाती हैं। आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं और अपनी प्रतिभा, मेहनत तथा लगन से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में परिवारों को बेटी के जन्म को भी उतनी ही खुशी और सम्मान के साथ मनाना चाहिए, जितना बेटे के जन्म पर मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। परिवार में बेटी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाने से समाज में यह संदेश जाता है कि बेटियां भी परिवार की खुशियों और भविष्य का अहम हिस्सा हैं। उन्हें भी बेटों के समान प्यार, सम्मान और आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।
बेटी के स्वागत से समाज को दिया सकारात्मक संदेश
हमीरपुर के बाईपास क्षेत्र में आयोजित यह स्वागत समारोह केवल एक परिवार की खुशी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को बेटियों के सम्मान का संदेश भी दिया। नन्ही श्रजीनिका के स्वागत के लिए रथ और बैंड-बाजे की व्यवस्था कर परिजनों ने उसके आगमन को यादगार बनाया।
बेटियों के जन्म पर इस तरह खुशियां मनाने की पहल समाज में समानता और सकारात्मक सोच को मजबूत करने में योगदान दे सकती है। शेर सिंह के परिवार ने अपनी परंपरा को दोहराते हुए यह संदेश दिया कि बेटी का जन्म भी परिवार के लिए उतना ही खास अवसर है, जिसे पूरे उत्साह और प्यार के साथ मनाया जाना चाहिए।



