➤ शिमला में हिम संगीत उत्सव के दूसरे दिन शास्त्रीय, सुगम और लोक संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियां
➤ दीपक मेहता, चारु शर्मा और धर्मपाल ठाकुर ने मंच पर बिखेरा सुरों का जादू
➤ हिमाचली लोक संगीत और शास्त्रीय गायन से दर्शक मंत्रमुग्ध
शिमला। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला, भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश तथा गेयटी ड्रामेटिक सोसाइटी शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिम संगीत उत्सव–2026 के दूसरे दिन शास्त्रीय, सुगम और हिमाचली लोक संगीत की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीपक मेहता के शास्त्रीय गायन से हुई। रामपुर (जिला शिमला) से संबंध रखने वाले दीपक मेहता पटियाला घराने से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पद्मश्री सोमदत्त बट्टू और डॉ. प्रवीण जरेट के मार्गदर्शन में शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की है। शास्त्रीय गायन में वह चार बार हिमाचल प्रदेश स्तर पर विजेता रह चुके हैं और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल भी हासिल कर चुके हैं।
उन्हें संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रफी अवार्ड 2012, किशोर अवार्ड 2011, हिमाचल गौरव 2016, बिग एफएम बिग गोल्डन वॉयस विजेता, कला शिखर सम्मान 2023 और रसराज कला सम्मान 2024 सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने देश और विदेश के अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं और वर्तमान में अपने शिष्यों को पटियाला घराने की शास्त्रीय गायन परंपरा की शिक्षा दे रहे हैं।
इसके बाद मंच पर चारु शर्मा ने शास्त्रीय और सुगम संगीत के साथ हिमाचली लोक संगीत की प्रस्तुतियां दीं। करसोग (जिला मंडी) के रौड़ीधार, मझाई गांव की रहने वाली चारु शर्मा भी पटियाला घराने की शास्त्रीय गायिका हैं। उन्होंने पद्मश्री सोमदत्त बट्टू से संगीत की तालीम ली है। वह आकाशवाणी शिमला से बी-हाई ग्रेड की अनुमोदित कलाकार हैं।
चारु शर्मा को संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार प्राप्त करने वाली हिमाचल की पहली महिला कलाकार होने का गौरव भी हासिल है। वह अब तक 100 से अधिक हिमाचली गीत रिकॉर्ड कर चुकी हैं, जिनमें कई गीत काफी लोकप्रिय हुए हैं। चंबा जिले पर आधारित फिल्म “सुन्नी भुंकु” के लिए भी उन्होंने दो गीत गाए हैं। पिछले 15 वर्षों से आकाशवाणी और दूरदर्शन शिमला पर वह नियमित रूप से अपनी प्रस्तुतियां दे रही हैं। वर्तमान में वह चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में संगीत अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं।
कार्यक्रम में तीसरे कलाकार के रूप में जिला सिरमौर के प्रसिद्ध लोक गायक धर्मपाल ठाकुर ने हिमाचली लोक संगीत की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों से खूब तालियां बटोरीं। सिरमौर जिले के लाना चेता क्षेत्र से संबंध रखने वाले धर्मपाल ठाकुर पारंपरिक और विलुप्त होती हिमाचली लोक गाथाओं और गीतों को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
वह आकाशवाणी शिमला से बी-हाई ग्रेड के मान्यता प्राप्त कलाकार हैं और देशभर में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। लोक संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें सैनधार कला सम्मान, कलाधर सम्मान और सिरमौर रत्न सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
धर्मपाल ठाकुर ने चूड़ेश्वर लोक नृत्य सांस्कृतिक मंडल के सदस्य कलाकार के रूप में यूरोप के बुल्गारिया, मैसोडोनिया, ग्रीस और तुर्की जैसे देशों में भी लोक गायन और वादन की प्रस्तुतियां दी हैं। उनके लोकप्रिय लोकगीतों में लागा लाणेया, चूड़े रा राजा, तुलसीरामो, पानी रे दीवे, चेलुवा और सिरमौरी टूलकी जैसे गीत शामिल हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।



