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21 अगस्त से हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र, 10 बैठकें होंगी; विपक्ष ने सरकार को घेरने की तैयारी की

21 अगस्त से शुरू होगा हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र, 3 सितंबर तक चलेंगी 10 बैठकें
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
1,036 सवालों से तय होगा सदन का एजेंडा, हंगामेदार सत्र के आसार


21 अगस्त से हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र, 10 बैठकें होंगी; विपक्ष ने सरकार को घेरने की तैयारी कीशिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। 3 सितंबर तक चलने वाले इस सत्र में कुल 10 बैठकें निर्धारित की गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र की तैयारियों और विधायकों से प्राप्त सूचनाओं को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही को सुचारू और प्रभावी ढंग से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा है।

मानसून सत्र को लेकर सियासी माहौल पहले ही गरमा चुका है। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कई अहम मुद्दों की तैयारी की है। खासकर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और विभिन्न संस्थानों को बंद किए जाने के मुद्दे सदन में जोर-शोर से उठने की संभावना है। ऐसे में इस बार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

21 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगा सत्र, 10 बैठकें निर्धारित

हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के अनुसार सत्र में कुल 10 बैठकें होंगी।

बजट सत्र और मानसून सत्र को मिलाकर अब तक विधानसभा की 26 बैठकें पूरी हो जाएंगी। वहीं, विधानसभा के लिए निर्धारित 35 बैठकों का आंकड़ा पूरा करने के लिए अभी 9 बैठकें शेष रहेंगी। इन बैठकों को आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान पूरा किए जाने की उम्मीद है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से चलाना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान हिमाचल विधानसभा की कार्यवाही 90 प्रतिशत से अधिक रही है। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं और सदन की कार्यक्षमता के लिहाज से सकारात्मक संकेत बताया।

1,036 सवालों से गरमाएगा सदन, ऑनलाइन मिली सभी सूचनाएं

मानसून सत्र से पहले विधायकों की ओर से बड़ी संख्या में सवाल विधानसभा सचिवालय को भेजे गए हैं। 18 अगस्त तक प्राप्त सूचनाओं के अनुसार सदस्यों ने कुल 1,036 प्रश्न भेजे हैं।

इनमें 787 तारांकित प्रश्न और 249 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। खास बात यह है कि सभी प्रश्न विधायकों की ओर से ऑनलाइन माध्यम से विधानसभा सचिवालय को भेजे गए हैं।

इतनी बड़ी संख्या में सवालों के आने से साफ है कि मानसून सत्र के दौरान सरकार के सामने विभिन्न विभागों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने की बड़ी चुनौती होगी। प्रश्नकाल के दौरान कई ऐसे मुद्दे सामने आ सकते हैं, जिन पर सरकार को सदन के भीतर विस्तृत जवाब देना होगा।

नियम-62 और 63 के तहत भी विधायकों ने भेजीं सूचनाएं

सत्र के लिए केवल तारांकित और अतारांकित प्रश्न ही नहीं, बल्कि अलग-अलग नियमों के तहत भी विधायकों ने सूचनाएं भेजी हैं।

विधानसभा सचिवालय को नियम-62 के तहत 13, नियम-63 के तहत 2, नियम-101 यानी प्राइवेट मेंबर डे के तहत 5 तथा नियम-130 के तहत 15 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं।

इन सूचनाओं के आधार पर भी सदन में अलग-अलग विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इससे संकेत मिल रहा है कि मानसून सत्र में केवल प्रश्नकाल ही नहीं, बल्कि विभिन्न नियमों के तहत उठाए जाने वाले विषय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहेंगे।

सर्वदलीय बैठक में बनेगी सदन चलाने की रणनीति

विधानसभा की कार्यवाही को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार मंगलवार शाम चार बजे होने वाली इस बैठक में सभी दलों के नेताओं से सहयोग का आग्रह किया जाएगा।

सर्वदलीय बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मानसून सत्र से पहले ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। ऐसे में अध्यक्ष की कोशिश होगी कि सदन में राजनीतिक मतभेद और तीखी बहस के बावजूद विधानसभा की कार्यवाही निर्धारित समय के अनुसार चलती रहे।

सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

आगामी मानसून सत्र में विपक्ष की ओर से सरकार पर सड़क व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है।

इसके अलावा प्रदेश में विभिन्न संस्थानों को बंद किए जाने का मुद्दा भी विपक्ष के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल बताया जा रहा है। इन मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है और सदन में सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर सकता है।

बारिश के मौसम में प्रदेश के कई हिस्सों में सड़क और संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के बीच सड़कों की स्थिति भी महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर भी विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर सकता है।

हंगामेदार रह सकता है मानसून सत्र

मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज होने लगी है। विपक्ष जहां सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से भी इन सवालों का जवाब देने की रणनीति बनाई जा रही है।

ऐसे में 21 अगस्त से शुरू होने वाला विधानसभा सत्र सियासी टकराव का मंच बन सकता है। प्रश्नों की बड़ी संख्या और नियमों के तहत प्राप्त सूचनाओं को देखते हुए सदन में चर्चा के लिए विषयों की कमी नहीं होगी।

हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में 90 प्रतिशत से अधिक कार्यवाही होने को सदन की सकारात्मक कार्यसंस्कृति बताया है। अब देखना होगा कि मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन की कार्यवाही कितनी प्रभावी और व्यवस्थित रहती है।