➤ हिमाचल में बसों समेत परिवहन वाहनों की परमिट फीस बदलने का प्रस्ताव
➤ हर दो साल बाद परमिट शुल्क में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान प्रस्तावित
➤ कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस का अस्थायी परमिट 750 और नियमित परमिट 1500 रुपये प्रस्तावित
शिमला। हिमाचल प्रदेश में निजी बस संचालकों और अन्य परिवहन वाहन मालिकों से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स, 1999 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित बदलाव का सीधा असर बसों समेत विभिन्न परिवहन वाहनों के परमिट शुल्क पर पड़ेगा। सरकार ने अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अस्थायी और नियमित परमिट की अलग-अलग फीस तय करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही परमिट शुल्क को हर दो साल बाद 10 प्रतिशत बढ़ाने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
सरकार की ओर से इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना जारी कर आम लोगों और प्रभावित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सुझावों पर विचार किया जाएगा और उसके बाद अंतिम नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसका असर प्रदेश में बस संचालन सहित अन्य परिवहन गतिविधियों से जुड़े निजी ऑपरेटरों और वाहन मालिकों की लागत पर पड़ सकता है। परमिट शुल्क में प्रस्तावित बदलाव के साथ हर दो साल में शुल्क बढ़ाने की व्यवस्था होने से भविष्य में परिवहन कारोबार की लागत में भी बदलाव आ सकता है।
अलग-अलग वाहनों के लिए अस्थायी और नियमित परमिट की अलग फीस
प्रस्ताव में परिवहन वाहनों की श्रेणी के आधार पर अस्थायी और नियमित परमिट के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत राज्य के भीतर या ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों के लिए अस्थायी परमिट की फीस 750 रुपये और नियमित परमिट की फीस 1500 रुपये प्रस्तावित की गई है।
इसी तरह अन्य स्टेज कैरिज और प्राइवेट सर्विस वाहनों के लिए अस्थायी परमिट की फीस 500 रुपये और नियमित परमिट के लिए 1000 रुपये रखने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद संबंधित वाहन श्रेणी के अनुसार परमिट लेने वाले संचालकों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। सरकार की ओर से प्रस्तावित दरों का उद्देश्य परमिट शुल्क की व्यवस्था को वाहन की श्रेणी और परमिट के प्रकार के अनुसार व्यवस्थित करना है।
हर दो साल बाद 10 प्रतिशत बढ़ेगी परमिट फीस
प्रस्तावित नियमों में केवल मौजूदा शुल्क दरों में बदलाव ही नहीं, बल्कि भविष्य में परमिट फीस में नियमित वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक शुल्क दरों में हर दो वर्ष बाद 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी।
नई राशि को निकटतम दस के गुणक में राउंड ऑफ करने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। यानी शुल्क में बढ़ोतरी के बाद बनने वाली राशि को निर्धारित नियम के अनुसार निकटतम दस के गुणक में समायोजित किया जाएगा।
यह प्रावधान निजी बस संचालकों और अन्य परिवहन वाहन मालिकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें भविष्य में परमिट से जुड़ी लागत का अनुमान पहले से लगाना होगा। दो साल के अंतराल पर शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि से परिवहन कारोबार की नियमित लागत में बदलाव आ सकता है।
परमिट फीस जमा करने के लिए कई विकल्प प्रस्तावित
परमिट के लिए आवेदन करने वाले वाहन मालिकों को निर्धारित शुल्क जमा करने के लिए भी प्रस्ताव में अलग व्यवस्था बताई गई है। इसके तहत फीस का भुगतान कैश रसीद, ऑनलाइन भुगतान या ट्रेजरी चालान के माध्यम से किया जा सकेगा।
परमिट या काउंटरसिग्नेचर के लिए शुल्क प्राप्त होने के बाद क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की ओर से अलग रसीद जारी करने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
इससे परमिट शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को औपचारिक और रिकॉर्ड आधारित बनाने की व्यवस्था तैयार होगी। ऑनलाइन भुगतान का विकल्प होने से वाहन मालिकों को शुल्क जमा करने के लिए उपलब्ध माध्यमों में एक और सुविधा मिल सकती है।
निजी बस ऑपरेटरों की लागत पर पड़ सकता है असर
प्रस्तावित संशोधन का सबसे सीधा प्रभाव निजी बस ऑपरेटरों, स्टेज कैरिज संचालकों और अन्य परिवहन वाहन मालिकों पर पड़ने की संभावना है। परमिट शुल्क में बदलाव के अलावा हर दो साल बाद 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान परिवहन कारोबार की दीर्घकालिक लागत को प्रभावित कर सकता है।
निजी बस संचालकों को पहले से ही ईंधन, कर्मचारियों, रखरखाव, बीमा, टैक्स और अन्य परिचालन खर्चों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में परमिट फीस में प्रस्तावित बदलाव और भविष्य की नियमित वृद्धि को भी उन्हें अपनी लागत और कारोबार की योजना में शामिल करना होगा।
हालांकि, अभी यह प्रस्तावित संशोधन है। अंतिम शुल्क और नियम आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बसों के टैक्स की गणना भी कई मानकों पर होती है
हिमाचल में बस संचालन की लागत केवल परमिट फीस तक सीमित नहीं है। बसों पर लगने वाला स्पेशल रोड टैक्स (SRT) भी कई मानकों के आधार पर तय होता है।
परिवहन विभाग के अनुसार स्टेज कैरिज वाहनों के लिए एसआरटी की गणना में रूट पर आने वाली सड़क की श्रेणी, दूरी, बस का प्रकार और सीट क्षमता जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है। यानी बस का टैक्स केवल वाहन के आधार पर निर्धारित नहीं होता, बल्कि जिस रूट पर बस चलती है और उसमें कितनी सीटें हैं, इसका भी महत्व होता है।
प्रदेश में वर्तमान एसआरटी व्यवस्था के तहत पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित हैं। इसके अलावा साधारण, एक्सप्रेस/नाइट, सेमी-डीलक्स, डीलक्स और एसी बसों के लिए भी अलग-अलग दरें लागू हैं।
ऐसे में परमिट शुल्क में प्रस्तावित बदलाव को बस ऑपरेटरों के लिए परिवहन कारोबार की कुल लागत के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
सरकार ने आम लोगों और प्रभावित पक्षों से मांगे सुझाव
हिमाचल सरकार ने प्रस्तावित संशोधन को लेकर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसका मतलब है कि अंतिम नियम लागू करने से पहले संबंधित पक्षों को अपनी राय रखने का अवसर दिया गया है।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की ओर से मिलने वाले सुझावों और आपत्तियों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा। इसके बाद सरकार संशोधन को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया में निजी बस संचालकों और अन्य परिवहन वाहन मालिकों की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित शुल्क में क्या बदलाव अंतिम रूप से लागू होते हैं और हर दो साल में 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने का प्रावधान किस रूप में प्रभावी होता है।
परिवहन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं संबंधित कानून और नियम
हिमाचल परिवहन विभाग की वेबसाइट पर परिवहन व्यवस्था से जुड़े प्रमुख कानून और नियम उपलब्ध हैं। इनमें मोटर व्हीकल एक्ट, केंद्रीय मोटर व्हीकल रूल्स, हिमाचल मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट और हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल रूल्स शामिल हैं।
प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद परमिट फीस से जुड़े नियमों में बदलाव का असर प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के परिवहन वाहनों पर पड़ेगा। फिलहाल मामला प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम निर्णय निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगा।
कुल मिलाकर, सरकार के इस प्रस्ताव से परमिट शुल्क की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव और भविष्य में शुल्क को नियमित अंतराल पर बढ़ाने की दिशा साफ दिखाई दे रही है। निजी बस संचालकों और अन्य परिवहन कारोबारियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतिम नियम लागू होने पर उन्हें परमिट संबंधी खर्च की नई व्यवस्था के अनुसार अपनी आर्थिक योजना तैयार करनी होगी।



