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आचार संहिता के बीच कैबिनेट बैठक पर चुनाव आयोग सख्त, भाजपा की शिकायत के बाद सरकार से मांगा जवाब

  • चुनाव आचार संहिता के बीच कैबिनेट बैठक पर चुनाव आयोग ने मांगा जवाब
  • भाजपा की शिकायत के बाद मुख्य सचिव को जारी किया गया पत्र
  • सरकार ने कहा- फैसले पहले से घोषित योजनाओं से जुड़े थे

हिमाचल प्रदेश में चुनाव आचार संहिता के दौरान हुई कैबिनेट बैठक को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। राज्य चुनाव आयोग ने भाजपा की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र जारी कर पूछा है कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद कैबिनेट बैठक आयोजित करते समय दिशा-निर्देशों का किस प्रकार पालन किया गया।

चुनाव आयोग ने अपने पत्र में इस मामले पर जल्द से जल्द जवाब देने को कहा है। हालांकि आयोग की ओर से जवाब देने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए थे। इन फैसलों से संबंधित खबरें मीडिया और समाचार पोर्टलों पर सामने आने के बाद भाजपा ने राज्य चुनाव आयोग को लिखित शिकायत भेजी।

यह शिकायत भाजपा के प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा की ओर से की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चुनाव आचार संहिता के बीच कैबिनेट बैठक में कई फैसले लिए गए, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। भाजपा ने आयोग से मांग की कि इन फैसलों की जांच कर उन्हें तत्काल प्रभाव से लागू होने से रोका जाए।

इसके साथ ही भाजपा ने यह भी मांग उठाई कि जिन अधिकारियों ने इन प्रस्तावों को कैबिनेट के समक्ष रखा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

वहीं राज्य सरकार ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताया है। संसदीय कार्य एवं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि शिमला नगर निगम क्षेत्र में आचार संहिता लागू नहीं है और शहरी निकाय चुनाव भी पहले ही संपन्न हो चुके हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि कैबिनेट बैठक में जिन मुद्दों पर फैसले लिए गए, वे पहले से घोषित योजनाओं और बजट घोषणाओं से जुड़े हुए थे। इनमें महिलाओं को 1500 रुपए देने और विभिन्न वर्गों के मानदेय बढ़ाने जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिनका उल्लेख पहले ही बजट में किया जा चुका है। इसलिए इसमें कोई नई घोषणा नहीं की गई।

अब इस मामले में सबकी नजर चुनाव आयोग के अगले कदम और राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हुई है।