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हिमाचल कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति का गठन, जानें किन दिग्गज नेताओं को मिली जिम्मेदारी

कांग्रेस हाईकमान ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति का किया गठन
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रतिभा सिंह और आनंद शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेताओं को मिली जगह
एआईसीसी प्रभारी और हिमाचल से जुड़े सचिव एक्स-ऑफिसियो सदस्य बनाए गए


नई दिल्ली/शिमला। कांग्रेस हाईकमान ने हिमाचल प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति (Political Affairs Committee) का गठन कर दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष की मंजूरी के बाद यह समिति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है

इस समिति में प्रदेश के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह, रोहित ठाकुर, आरएस बाली, आशा कुमारी और कुलदीप सिंह राठौर जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। पार्टी का मानना है कि इस समिति के गठन से संगठनात्मक निर्णयों, राजनीतिक रणनीति और सरकार व संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

जारी सूची के अनुसार समिति में विनय कुमार, सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुकेश अग्निहोत्री, आनंद शर्मा, प्रतिभा सिंह, अनुराग शर्मा, कौल सिंह ठाकुर, कुलदीप सिंह राठौर, कुलदीप कुमार, आशा कुमारी, चंदर कुमार चौधरी, कर्नल धनी राम शांडिल, हर्षवर्धन चौहान, जगत सिंह नेगी, रोहित ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह, विक्रमादित्य सिंह, राजेश धर्माणी, यादविंदर गोमा, राम लाल ठाकुर, नंद लाल, आरएस बाली, भवानी सिंह पठानिया, केहर सिंह खाची और सुरेंद्र शर्मा को सदस्य बनाया गया है।

इसके अलावा एआईसीसी के हिमाचल प्रभारी और हिमाचल से जुड़े एआईसीसी सचिवों को समिति में एक्स-ऑफिसियो सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। राजनीतिक मामलों की समिति पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली प्रमुख इकाइयों में से एक मानी जाती है, जो संगठनात्मक मुद्दों, चुनावी रणनीति और प्रदेश स्तर की राजनीतिक गतिविधियों पर अहम भूमिका निभाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समिति आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक रणनीति तय करने और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, खासकर तब जब प्रदेश में सरकार भी कांग्रेस की है और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चुनौती बनी हुई है।