➤ पंचायत और शहरी निकाय चुनाव के लिए 41 अधिकारियों की पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती
➤ राज्य चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए सख्त निर्देश जारी किए
➤ हर जिले और ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों को दी गई अहम जिम्मेदारी
हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में राज्य चुनाव आयोग ने शुक्रवार को चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए 41 आईएएस, आईएफएस, एचएएस और एचपीएफएस अधिकारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इस संबंध में राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न करवाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आयोग ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियुक्त पर्यवेक्षकों को हर प्रकार की आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाएं, ताकि वे अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें। साथ ही सभी पर्यवेक्षकों को तुरंत ड्यूटी ज्वाइन करने और शिमला स्थित मुख्यालय से चुनाव से जुड़े दिशा-निर्देश व दस्तावेज प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
शहरी निकाय चुनाव के लिए पहले नियुक्त कुछ पर्यवेक्षकों में बदलाव करते हुए नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर परिषद बिलासपुर और घुमारवीं के लिए अब एचएएस अधिकारी दीप्ति मंडोत्रा को तैनात किया गया है। नगर निगम पालमपुर, बैजनाथ और पालमपुर ब्लॉक के लिए आईएएस अधिकारी सुनील शर्मा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
इसी तरह नगर परिषद कुल्लू, मनाली, नगर पंचायत भुंतर और संबंधित ब्लॉकों के लिए आईएएस राजीव कुमार को जिम्मेदारी दी गई है। नगर निगम सोलन, कंडाघाट और धर्मपुर क्षेत्र के लिए दोरजे छैरिंग को पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि धर्मशाला नगर निगम, कांगड़ा नगर परिषद और संबंधित ब्लॉकों के लिए आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को नियुक्त किया गया है।
पंचायत चुनाव के लिए भी जिला और ब्लॉक स्तर पर व्यापक स्तर पर अधिकारियों की तैनाती की गई है। बिलासपुर जिले में बिलासपुर और घुमारवीं ब्लॉक के लिए आईएएस रोहित जम्वाल, जबकि श्रीनैना देवी और झंडूता के लिए एचपीएफएस सुकल्प कुमार शर्मा को जिम्मेदारी दी गई है।
चंबा जिले में मैहला और चंबा ब्लॉक के लिए आईएफएस डी. पाटिल नितिन कुंडलिक, तीसा और सलूणी के लिए आईएफएस रघुराम, पांगी के लिए आईएफएस राजेश कुमार शर्मा, भटियात के लिए एचएएस विनय धीमान और भरमौर के लिए एचएएस कुलविंदर सिंह राणा को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
हमीरपुर जिले में सुजानपुर, नादौन और हमीरपुर ब्लॉक के लिए आईएएस शुभकरण सिंह, जबकि भोरंज, बिछड़ी और बमसन के लिए एचपीएफएस जगदीश गौतम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सोलन जिले में कंडाघाट, धर्मपुर और सोलन ब्लॉक के लिए आईएएस अश्वनी कुमार शर्मा, जबकि पट्टा, नालागढ़ और कुनिहार के लिए एचएएस सुरेंद्र कुमार को नियुक्त किया गया है।
सिरमौर जिले में नाहन, संगड़ाह और ददाहू के लिए आईएएस सुमित खिमटा, जबकि शिलाई, कमराऊ और पांवटा साहिब के लिए एचपीएफएस संजय कुमार को जिम्मेदारी दी गई है।
ऊना जिले में अंब और गगरेट के लिए एचएएस विनय मोदी, जबकि बंगाणा, हरोली और ऊना ब्लॉक के लिए एचएएस संजीव कुमार को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
लाहौल-स्पीति और किन्नौर में लाहौल के लिए एचएएस चरंजी लाल, काजा के लिए आईएफएस अशोक कुमार नेगी, तथा किन्नौर के कल्पा, निचार और पूह ब्लॉकों के लिए आईएफएस थर्मवीर मीना को जिम्मेदारी दी गई है।
कांगड़ा जिले में धर्मशाला, कांगड़ा और रेत ब्लॉक के लिए आईएएस विनय सिंह, बैजनाथ और पालमपुर के लिए राम कुमार गौतम, इंदौरा, नूरपुर और फतेहपुर के लिए आईएफएस दिनेश शर्मा, देहरा, परागपुर, सुरानी और नगरोटा सूरिया के लिए एचएएस अनुपम कुमार, नगरोटा बगवां, सुलह और बड़ोह के लिए एचपीएफएस अजय कुमार, तथा लंबागांव, भवारना और पंचरुखी के लिए एचपीएफएस नरेश कुमार को नियुक्त किया गया है।
कुल्लू जिले में नगर, कुल्लू और भुंतर के लिए आईएएस नीरज कुमार, जबकि आनी, निरमंड और बंजार के लिए एचएएस ज्ञान सागर नेगी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मंडी जिले में बल्ह, सदर मंडी और बालीचौकी के लिए आईएएस विजय कुमार, धर्मपुर, गोपालपुर, चौंतड़ा और दरंग के लिए आईएफएस सुभाष चंद पराशर, चुराह, करसोग और सराज के लिए एचपीएफएस कमल जसवाल, तथा धनोटू, सुंदरनगर, निहरी और गोहर के लिए एचएएस शशिपाल सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
शिमला जिले में नारकंडा, ठियोग और कोटखाई के लिए एचएएस चेतन खडवाल, रामपुर और ननखड़ी के लिए आईएफएस चमन लाल, चौहारा, रोहड़ू और जुब्बल के लिए एचएएस अमित गुलेरिया, मशोबरा, बसंतपुर और टुटू के लिए एचपीएफएस संजीव कुमार, तथा चौपाल और कुपवी के लिए एचपीएफएस अनिल कुमार को जिम्मेदारी दी गई है।
इन पर्यवेक्षकों का मुख्य कार्य चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखना, आचार संहिता के पालन को सुनिश्चित करना, किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना और चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाना होगा।
राज्य चुनाव आयोग का मानना है कि इस व्यापक निगरानी व्यवस्था से प्रदेश में निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित होगी, जिससे मतदाताओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।



