➤ NPK और MOP खाद के दाम किसानों-बागवानों की पहुंच से बाहर
➤ हिमफेड ने केंद्र से सब्सिडी बढ़ाने और कीमतें नियंत्रित करने की मांग उठाई
हिमाचल प्रदेश में खेती और बागवानी लगातार महंगी होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह उर्वरकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है। पिछले करीब 12 वर्षों में यूरिया को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख खादों के दाम 60 फीसदी से 120 फीसदी तक बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर किसानों और बागवानों की आर्थिकी पर पड़ रहा है। बढ़ती लागत के कारण फसलों और बागवानी उत्पादों की तैयारी पहले की तुलना में काफी महंगी हो गई है।
राज्य सरकार के उपक्रम Himachal Pradesh State Cooperative Marketing and Consumer Federation (हिमफेड) के आंकड़ों के अनुसार, NPK (12:32:16) खाद का एक बैग वर्ष 2014 में जहां 1060 रुपये में मिलता था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 1900 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह MOP (60%) का बैग 800 रुपये से बढ़कर 1850 रुपये हो गया है, जो लगभग 120 फीसदी वृद्धि को दर्शाता है।
इसके अलावा NPK (15:15:15) की कीमत 870 रुपये से बढ़कर 1400 रुपये हो गई है, जबकि NPK (16:16:16) अब 1750 रुपये प्रति बैग बिक रहा है। खादों की इन बढ़ी हुई कीमतों ने खेती की लागत में बड़ा उछाल ला दिया है, जिससे छोटे और मध्यम किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
ठियोग के प्रोग्रेसिव ग्रोअर Mahendra Verma ने कहा कि महंगी खादें अब ज्यादातर किसानों और बागवानों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। उनका कहना है कि हर साल खाद और कीटनाशकों के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे खेती करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि खाद और कीटनाशकों की कीमतों को नियंत्रित किया जाए।
वहीं हिमफेड के चेयरमैन Maheshwar Chauhan ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हिमफेड किसानों को खाद उपलब्ध कराने का काम कर रहा है, लेकिन खाद की कीमतें पूरी तरह केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। पिछले वर्षों में दामों में भारी बढ़ोतरी ने किसानों और बागवानों को गंभीर आर्थिक दबाव में डाल दिया है।
महेश्वर चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को जो मासिक आर्थिक सहायता देती है, उससे कहीं ज्यादा राशि खादों की बढ़ी कीमतों के जरिए वापस वसूली जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाने की मांग की, ताकि किसानों को राहत मिल सके।



