➤ हिमाचल सरकार ने सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति और दोबारा नियुक्ति पर लगाई रोक
➤ कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को जारी किए सख्त निर्देश
➤ मौजूदा सेवा विस्तार वाले कर्मचारी कार्यकाल पूरा होने पर माने जाएंगे सेवानिवृत्त
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति और दोबारा काम पर रखने की प्रक्रिया पर बड़ा फैसला लेते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस संबंध में मंगलवार को कार्मिक विभाग की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के अनुसार अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार देने, पुनर्नियुक्त करने या दोबारा काम पर रखने से संबंधित कोई भी प्रस्ताव प्रशासनिक विभागों द्वारा भेजा नहीं जाएगा।
सरकार ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर किसी भी स्तर पर विचार नहीं किया जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह आदेश अत्यंत आवश्यक श्रेणी में जारी किया गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले में किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
यह फैसला राज्य सरकार की हालिया कर्मचारी सेवा शर्तों में बदलाव और प्रशासनिक सुधारों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। कार्मिक विभाग पिछले कुछ समय से भर्ती, नियमितीकरण और सेवा नियमों में लगातार बदलाव कर रहा है। हाल में राज्य में अनुबंध नियुक्तियों पर भी रोक से जुड़े निर्देश सामने आए थे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो अधिकारी और कर्मचारी वर्तमान में पहले से सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति या दोबारा काम पर रखे जाने की स्थिति में हैं, उन्हें उनका वर्तमान कार्यकाल पूरा होने तक काम करने दिया जाएगा। लेकिन जैसे ही उनका निर्धारित कार्यकाल समाप्त होगा, उन्हें सेवानिवृत्त माना जाएगा और आगे किसी नए विस्तार पर विचार नहीं किया जाएगा।
यह फैसला प्रशासनिक व्यवस्था में नई भर्तियों और पदोन्नतियों के रास्ते खोलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति को केवल असाधारण परिस्थितियों और जनहित तक सीमित रखने की बात कही थी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे लंबे समय से सेवा विस्तार पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही विभागों में खाली होने वाले पदों पर नई नियुक्तियों की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।



