➤ हिमाचल में मानसून सक्रिय, 17 और 18 अगस्त को कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट
➤ कांगड़ा, बिलासपुर, चंबा और मंडी में ज्यादा असर की संभावना, हमीरपुर-सिरमौर में भी बारिश का जोर
➤ भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, जलभराव और तेज हवाओं का खतरा, नदी-नालों के पास जाने से बचने की सलाह
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून अभी पूरी तरह थमा नहीं है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और मौसम विभाग ने अगले कई दिनों तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया है। खासकर 17 और 18 अगस्त को कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान कांगड़ा, बिलासपुर, चंबा, मंडी, हमीरपुर और सिरमौर के कुछ हिस्सों में बारिश का असर ज्यादा रहने की संभावना है।
15 अगस्त को जारी मौसम बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश भी दर्ज की गई। कांगड़ा के गुलेर में सबसे ज्यादा 13 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कांगड़ा एयरो और हमीरपुर के नादौन में 10-10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हुई।
17-18 अगस्त को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 17 और 18 अगस्त को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसी दौरान कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। सप्ताह के बाकी दिनों में भी कई क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रह सकता है और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
जिला स्तर पर भी मौसम को लेकर चेतावनी दी गई है। बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और मंडी में 17 और 18 अगस्त के दौरान कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं हमीरपुर और सिरमौर में 17 अगस्त को भारी बारिश और कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
ऐसे में इन जिलों के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों और बारिश के दौरान यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
बारिश के साथ बढ़ेगा भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा
लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा खिसकने का खतरा बढ़ सकता है। भारी से बहुत भारी बारिश होने की स्थिति में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की आशंका भी बढ़ जाती है।
बारिश के दौरान नदियों, नालों और अन्य जल निकायों में जलस्तर और बहाव अचानक बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा होने के साथ सड़कों पर फिसलन भी बढ़ सकती है।
पहाड़ी सड़कों पर बारिश के कारण दृश्यता कम होने और सड़क पर मलबा या पानी आने से वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बन सकती है। लगातार बारिश का असर खेती और बागवानी पर भी स्थानीय स्तर पर पड़ने की आशंका है।
पहाड़ी जिलों में तेज हवाओं और बिजली का खतरा
मौसम विभाग ने 15 से 21 अगस्त के दौरान किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। निचले और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में भी इस दौरान आंधी-तूफान, बिजली चमकने और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
ऐसे मौसम में लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और कमजोर ढांचों के आसपास अनावश्यक रूप से रुकने से बचने की सलाह दी गई है। गरज-चमक और तेज बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
खासकर बारिश के दौरान नदी-नालों और तेज बहाव वाले जलस्रोतों के आसपास जाने से बचना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है और सामान्य दिखने वाले नाले भी अचानक उफान पर आ सकते हैं।
तापमान में अभी बड़े बदलाव की संभावना नहीं
बारिश के बावजूद अगले चार से पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। अगले 48 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान सामान्य रहने का अनुमान है। इसके बाद दो से तीन दिनों में राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है।
पिछले 24 घंटों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान करीब 12 से 16 डिग्री सेल्सियस रहा। मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में यह 14 से 23 डिग्री और निचले पहाड़ी एवं मैदानी इलाकों में 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
कुल मिलाकर हिमाचल में अगले कुछ दिन बारिश और मौसम संबंधी जोखिमों के लिहाज से अहम रहने वाले हैं। 17 और 18 अगस्त को विशेष रूप से भारी बारिश की संभावना को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की जरूरत है।



