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मानसून की पहली बारिश से तबाही! दो की मौत, सड़के -बिजली- पानी प्रभावित, सात जुलाई तक राहत नहीं

मानसून की पहली भारी बारिश से हिमाचल में व्यापक तबाही
लाहौल-स्पीति और चंबा में बादल फटे, 35 सड़कें बंद
ऑरेंज अलर्ट जारी, सात जुलाई तक खराब मौसम का पूर्वानुमान


हिमाचल प्रदेश में मानसून की पहली ही भारी बारिश ने प्रदेशभर में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लाहौल-स्पीति में दो और चंबा में एक स्थान पर बादल फटने से सड़कें, पुलियां, संपर्क मार्ग और फसलें प्रभावित हुई हैं। वहीं मंडी जिले में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार फिलहाल 35 सड़कें बंद, 127 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं और कई इलाकों में बिजलीपेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने दो और तीन जुलाई के लिए चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

मौसम विभाग के अलर्ट के बीच बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने सबसे अधिक असर लाहौल-स्पीति, चंबा, मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर, किन्नौर और ऊना जिलों में दिखाया। लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई स्थानों पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले 24 घंटों के दौरान चंबा में सामान्य से 544 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि कांगड़ा में 572 प्रतिशत और कुल्लू में 501 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

लाहौल-स्पीति के जिस्पा में मंगलवार रात बादल फटने से नाले में अचानक बाढ़ आ गई। मलबा आने से मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया, जबकि तांदी-संसारी मार्ग पर भी यातायात रोकना पड़ा। पट्टन घाटी के पड़ाक गांव में बादल फटने से आई बाढ़ ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया और रीवालिंग संपर्क सड़क भी बाधित हो गई।

चंबा जिले के साहो क्षेत्र की कीड़ी पंचायत में बादल फटने से सेब के बागानों को नुकसान पहुंचा। कीड़ी-बंजल मार्ग पर जुंगली नाला के पास करीब 500 मीटर सड़क बह गई, जबकि कैंची मोड़ के समीप तीन पैदल पुलियां तेज बहाव में बह गईं। पठानकोट-भरमौर हाईवे और चंबा-तीसा मार्ग कई घंटों तक बंद रहने से करीब 30 पंचायतों का संपर्क प्रभावित रहा। सलूणी में कई घरों में मलबा घुस गया, जबकि किलाड़-सेचू मार्ग पर राहत कार्य में लगी एक जेसीबी मशीन भी मलबे में दब गई।

मंडी जिले में बुधवार सुबह औट स्थित शनि मंदिर के पास एक महिला कार से उतरते ही पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आ गई। हादसे में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं जिले में ब्यास नदी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

बारिश के चलते प्रदेशभर में 35 सड़कें बंद हैं और 127 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। कई क्षेत्रों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित है। ऊना में भारी बारिश से सड़कें जलमग्न हो गईं, सब्जी मंडी का कारोबार प्रभावित हुआ और एक स्कूल परिसर में पानी भर गया। भरवाईं में राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा धंसने से तीन दुकानों पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं रामपुर में गानवी खड्ड का जलस्तर बढ़ने से तीन पंचायतों का संपर्क कट गया।

किन्नौर जिले के रिस्पा नाले में आई बाढ़ से गांव को जोड़ने वाली सड़क बह गई। वहीं नाथपा बांध से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। बिलासपुर-सोलन सीमा के क्यारड़ क्षेत्र में भारी भूस्खलन के कारण शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग करीब आठ घंटे तक बंद रहा, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रदेश में बारिश का असर पर्यटन पर भी देखने को मिला। कुल्लू जिले की पार्वती घाटी के जैनाला में पंजाब के 21 वर्षीय पर्यटक अंशतेजी की नाले में नहाते समय डूबने से मौत हो गई। वह अपने दोस्तों के साथ कसोल और मणिकर्ण घूमने आया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में 2 और 3 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट रहेगा। 5 और 6 जुलाई को भी कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। विभाग के अनुसार 7 जुलाई तक प्रदेश में मौसम खराब बना रहेगा।

मानसून की शुरुआत के साथ लोक निर्माण विभाग ने भी फील्ड में तैनात कर्मचारियों की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं। अधिकारियों को लगातार फील्ड में रहकर सड़क बहाली और राहत कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।