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मातृत्व अवकाश मांगने नौकरी से निकाला, अब हाईकोर्ट ने लगाई रोक

➤ डॉ. आईना शर्मा की सेवा समाप्ति के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

➤ मातृत्व लाभ के लिए 4 अगस्त 2026 को आवेदन, तीन दिन बाद समाप्त की गई सेवाएं

➤ केंद्र सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाब तलब, अगली सुनवाई 18 नवंबर को


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तीन दिन बाद महिला वैज्ञानिक की सेवाएं समाप्त किए जाने के मामले में अहम अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने सेवा समाप्ति के आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता डॉ. आईना शर्मा को तुरंत पद पर बहाल करने के निर्देश दिए हैं। महिला वैज्ञानिक ने अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देते हुए इसे अवैध और भेदभावपूर्ण बताया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने केंद्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

मातृत्व लाभ के आवेदन के तीन दिन बाद समाप्त की गई सेवा

याचिका के अनुसार, डॉ. आईना शर्मा को 14 मार्च 2024 को जारी विज्ञापन के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की ओर से वित्त पोषित वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) योजना में साइंटिस्ट-बी (मेडिकल) के पद पर नियुक्त किया गया था।

शुरुआत में उनकी नियुक्ति एक वर्ष के लिए की गई थी। बाद में उनके अनुबंध की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी गई थी। याचिका में बताया गया कि डॉ. शर्मा ने 4 अगस्त 2026 को विभाग के समक्ष मातृत्व लाभ के लिए आवेदन किया था। इसके तीन दिन बाद विभाग ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।

सेवा समाप्ति और मातृत्व लाभ के आवेदन के बीच कम समय का अंतर इस मामले का प्रमुख पहलू है। याचिकाकर्ता ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर अदालत से राहत मांगी थी।

नई योजना के स्टाफिंग पैटर्न का दिया गया हवाला

याचिका में सामने आए तथ्यों के अनुसार, विभाग ने सेवा समाप्ति के पीछे 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान संशोधित वीआरडीएल योजना के नए स्टाफिंग पैटर्न को लागू करने का हवाला दिया था।

वहीं, डॉ. आईना शर्मा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि विभाग पहले ही उनके अनुबंध की अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ा चुका था। ऐसे में निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले उनकी सेवाएं समाप्त करने के निर्णय पर सवाल उठाए गए।

याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि योजना को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसका नाम बदलकर नए सिरे से अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव किया जा रहा है। इन परिस्थितियों को भी सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती देने के दौरान अदालत के सामने रखा गया।

याचिकाकर्ता ने कार्रवाई को बताया अवैध और भेदभावपूर्ण

डॉ. आईना शर्मा की ओर से अदालत में कहा गया कि मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तुरंत बाद उनकी सेवाएं समाप्त करना अवैध और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती देते हुए अदालत से राहत देने की मांग की।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और याचिकाकर्ता को तत्काल पद पर बहाल करने के निर्देश दिए। यह अदालत का अंतरिम आदेश है। मामले के सभी पक्षों की दलीलों और आगे की सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय सामने आएगा।

केंद्र सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस

हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अब अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। इस दौरान प्रतिवादियों के जवाब और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर आगे विचार किया जा सकता है। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश के अनुसार डॉ. आईना शर्मा को पद पर तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला मातृत्व लाभ के लिए आवेदन और अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारी की सेवा समाप्ति के बीच संबंध को लेकर उठाए गए सवालों के कारण महत्वपूर्ण है। हालांकि, सेवा समाप्ति के निर्णय की वैधता और याचिका में उठाए गए अन्य मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।