➤ हिमाचल हाईकोर्ट ने नियमों के विपरीत आवास आवंटन पर GAD सचिव पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
➤ अदालत ने सामान्य पूल आवास आवंटन को रद्द किया, आदेश — चार सप्ताह में नियमानुसार पुनर्विचार हो
➤ न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की बेंच ने कहा — आवास आवंटन प्रक्रिया में घोर अनियमितता और जल्दबाजी हुई
शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने नियमों के विपरीत सरकारी आवास आवंटन करने पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के सचिव पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह राशि मुख्य न्यायाधीश आपदा राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा सामान्य पूल से किया गया आवास आवंटन रद्द कर दिया गया है।
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने आवास आवंटन में कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने 5 जनवरी 2024 और 16 मार्च 2024 को जारी आवास आवंटन पत्रों को रद्द कर दिया।
यह मामला उस आवंटन से जुड़ा था, जिसमें एक ड्राइवर को आउट ऑफ टर्न सरकारी आवास दे दिया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों के आवेदन पहले से लंबित थे। अदालत ने कहा कि यह कदम हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास (सामान्य पूल) आवंटन नियम, 1994 के नियम 8(7) का उल्लंघन है।
अदालत ने पाया कि आवास आवंटन जल्दबाजी में किया गया और प्रक्रिया पूरी तरह से अनियमित रही। नियमों के अनुसार, आउट ऑफ टर्न आवंटन की शक्ति केवल हाउस अलॉटमेंट कमेटी के पास है, न कि प्रधान सचिव (सामान्य प्रशासन) के पास। अदालत ने इस कार्रवाई को अनुचित, अवैध और प्रशासनिक नियमों के खिलाफ करार दिया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता और ड्राइवर के आवेदनों पर नियमानुसार विचार किया जाए, और आवंटन सुमित कुमार केस में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाए।



