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CM सुक्खू ने उद्योगपतियों को हिमाचल में निवेश का न्योता , पर्यटन और IT सेक्टर में 3000 करोड़ निवेश की तैयारी

➤ पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग और IT सेक्टर में निवेश के लिए बुलावा
➤ उद्योगपतियों को हर सुविधा और सिंगल विंडो सिस्टम मजबूत करने का भरोसा
➤ 3000 करोड़ निवेश योजना, हेलीपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस


Confederation of Indian Industry (CII) हिमाचल प्रदेश के वार्षिक सम्मेलन में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उद्योग जगत को बड़ा संदेश देते हुए पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरित (ग्रीन) उद्योगों को बढ़ावा दे रही है और निवेशकों को हर संभव सहयोग व सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। साथ ही पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में करीब 3000 करोड़ रुपये निवेश की योजना पर काम चल रहा है।


इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट बनाए जा रहे हैं, जबकि हेली-टैक्सी सेवाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। इसके अलावा कांगड़ा हवाई अड्डा के विस्तार का कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिससे पर्यटन और उद्योग दोनों को फायदा मिलेगा।


उद्योगपतियों को स्पष्ट संदेश

सीएम ने साफ कहा कि उद्योगपतियों का उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रख सकते हैं। उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि सभी जरूरी मंजूरियां एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि निवेश प्रक्रिया आसान हो सके।


औद्योगिक क्षेत्रों में विकास की योजना

सरकार सीमावर्ती औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर काम कर रही है।

  • बद्दी में अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट्स बनाए जाएंगे

  • बिजली लोड की समस्याओं को दूर किया जाएगा

  • ऊना के हरोली में बल्क ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है

  • बद्दी तक रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काम जारी


केंद्र से सहायता और राज्य की स्थिति

सीएम ने कहा कि हिमाचल को ‘लंग्स ऑफ नॉर्थ इंडिया’ और ‘वाटर बाउल’ कहा जाता है, लेकिन इसके बावजूद राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं मिला।

वहीं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि राज्य सरकार संसाधन जुटाने और आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावितों के लिए 1500 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का इंतजार अब भी जारी है।