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हिमाचल में जल शक्ति विभाग के 393 आउटसोर्स कर्मियों को एक साल का सेवा विस्तार, आदेश जारी

➤ 393 आउटसोर्स तकनीकी कर्मियों की सेवाएं 30 सितंबर 2027 तक बढ़ीं

➤ वित्त विभाग की मंजूरी के बाद जल शक्ति विभाग ने जारी की औपचारिक स्वीकृति

➤ जल जीवन मिशन समेत तकनीकी कामों में कर्मचारियों की कमी से राहत मिलने की उम्मीद


शिमला। हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग में कार्यरत 393 आउटसोर्स तकनीकी कर्मियों को प्रदेश सरकार ने एक साल का सेवा विस्तार दिया है। इन कर्मचारियों की सेवाएं अब 1 अक्तूबर 2026 से 30 सितंबर 2027 तक जारी रहेंगी। सेवा विस्तार को लेकर वित्त विभाग की पूर्व मंजूरी मिलने के बाद जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव की ओर से इंजीनियर-इन-चीफ के माध्यम से औपचारिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। सरकार के इस निर्णय से विभाग में तकनीकी सहायता, डाटा प्रबंधन, मॉनिटरिंग, बिलिंग और जल जीवन मिशन से जुड़े कामों में लगे कर्मचारियों को फिलहाल सेवा जारी रखने का अवसर मिलेगा।

सेवा विस्तार पाने वाले 393 कर्मियों में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर तैनात आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। इनमें नाइलिट शिमला के माध्यम से आउटसोर्स आधार पर तैनात 122 तकनीकी सहायता कर्मी सह कंप्यूटर ऑपरेटर, दो तकनीकी सहायता कर्मी सह डाटा एंट्री ऑपरेटर तथा जल जीवन मिशन से जुड़े 268 डाटा एंट्री ऑपरेटर और अकाउंटेंट शामिल हैं। इन कर्मचारियों की सेवाएं विभाग की विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक गतिविधियों को संचालित करने में इस्तेमाल की जा रही हैं।

वित्त विभाग की मंजूरी के बाद जारी हुआ आदेश

सेवा विस्तार का निर्णय वित्त विभाग के व्यय नियंत्रण-2 की 25 सितंबर 2026 को दी गई पूर्व स्वीकृति के बाद लिया गया है। इसके आधार पर जल शक्ति विभाग की ओर से औपचारिक आदेश जारी किया गया। सेवा विस्तार हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियम 2009 के प्रावधानों के तहत रहेगा।

आदेश के अनुसार विभाग को संबंधित बजट मद में आवश्यक धनराशि की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इस मद के लिए सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग नहीं की जा सकेगी। यानी सेवा विस्तार के दौरान कर्मचारियों से संबंधित खर्च के लिए विभाग को उपलब्ध बजटीय प्रावधानों के भीतर ही व्यवस्था करनी होगी।

जल जीवन मिशन के कामों में निभा रहे अहम भूमिका

इन आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से जल शक्ति विभाग में डाटा प्रबंधन, बिलिंग, मॉनिटरिंग और तकनीकी सहायता से जुड़े कई काम किए जा रहे हैं। वहीं जल जीवन मिशन के तहत तैनात डाटा एंट्री ऑपरेटर और अकाउंटेंट योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक कार्यों में सहयोग कर रहे हैं।

विभाग में इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रहने से तकनीकी और डाटा संबंधी कामों में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। सेवा विस्तार नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों की उपलब्धता कम होने से विभाग की कुछ गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका थी। अब एक साल के विस्तार के बाद संबंधित कार्यों को आगे भी जारी रखने में सुविधा होगी।

केंद्र प्रायोजित योजनाओं का खर्च उपलब्ध प्रावधानों से होगा

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं से जुड़े आउटसोर्स कर्मचारियों पर होने वाला खर्च विभाग को उपलब्ध बजटीय प्रावधानों से ही वहन करना होगा। इसके लिए सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग नहीं की जा सकेगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के भीतर कर्मचारियों की सेवाओं को जारी रखना है। सेवा विस्तार की अवधि में विभाग को बजट संबंधी प्रावधानों का पालन करते हुए कर्मचारियों से जुड़े खर्च का प्रबंधन करना होगा।

कर्मचारियों और विभागीय कामकाज दोनों के लिए राहत

एक साल का सेवा विस्तार मिलने से 393 आउटसोर्स कर्मियों को फिलहाल रोजगार जारी रहने की राहत मिली है। वहीं विभाग के स्तर पर भी तकनीकी सहायता और डाटा प्रबंधन जैसे नियमित कामों के लिए अनुभवी कर्मचारियों की उपलब्धता बनी रहेगी।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों और जनहित से जुड़ी योजनाओं की निरंतरता को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को जलापूर्ति तथा जल शक्ति विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

जल शक्ति विभाग में बड़ी संख्या में योजनाएं और तकनीकी गतिविधियां चल रही हैं। ऐसे में आउटसोर्स तकनीकी कर्मचारियों की सेवाएं अगले एक साल तक जारी रहने से विभागीय कामकाज में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल जारी आदेश के तहत 393 कर्मियों का सेवा विस्तार 30 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगा।